हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में भगवान राम के अनन्य भक्तों में से एक श्री त्यागराज स्वामी का आराधना महोत्सव मनाया गया। निज मंदिर में दिल्ली से आए कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से त्यागराज स्वामी जी की प्रसिद्ध पंचरत्न कृतियों का गायन किया। भगवान राम के कई ऐसे अनन्य भक्त हैं। जिन्होंने अपने-अपने तरीके से उनकी आराधना की है। ऐसे ही एक संत थे स्वामी त्यागराज। दक्षिण भारत में 17 वीं शताब्दी में 1967 में अवतरित हुए स्वामी त्यागराज ने भगवान राम के प्रति 800 से ज्यादा कृति लिखीं और उनका गायन किया। 6 जनवरी 1847 को गोलोक गमन को गए स्वामी त्यागराज को कलयुग का महर्षि वाल्मीकि भी कहा जाता है। स्वामी त्यागराज जी के आराधना महोत्सव में दिल्ली के हंसिमि ग्रुप के 11 सदस्यों ने दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में भगवान के समक्ष प्रस्तुति दी। निज मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत के माध्यम से कलाकारों ने वासुदेवन्न के नेतृत्व में स्वामी त्यागराज जी की प्रसिद्ध पंचरत्न कृतियों का गायन किया। श्री रंगनाथ मंदिर के निज मंदिर में भगवान के समक्ष शास्त्रीय कलाकारों ने स्वामी त्यागराज जी की पंचरत्न कृतियों का गायन किया। गायन में वासुदेवन, श्री मति कमला श्रीनिवासन, कुमारी हरिकी मुरली,कुमारी अनन्या शंकर रमन,कुमारी श्री लक्ष्मी मुरली धरन, श्री मति शुभदा अरुण, श्री मति उषा राकेश मलिक, आर्या रमेश के अलावा वायलन पर जी राजेंद्र प्रसाद,मृदंग पर मनोहर बाल चंदन और घटक बजाकर वरुण राज शेखर ने प्रस्तुति दी। श्री रंगनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भगवान के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने जब स्वामी त्यागराज जी की पंचरत्न कृतियों को सुना तो वह मंत्र मुग्ध हो गए। श्रद्धालु सब कुछ भूल कर गायन का आनंद लेने लगे। कार्यक्रम के अंत में मंदिर के रघुनाथ स्वामी ने भगवान की प्रसादी माला और वस्त्र भेंट कर कलाकारों को सम्मानित किया । इस अवसर पर राजू स्वामी, रंगा स्वामी,प्रतिभा शर्मा, पुंडरीक स्वामी,अनघा श्रीनिवासन, एम एल पांडे,कल्पना शर्मा,लखन लाल पाठक, शरद शर्मा,तिरुपति राव आदि उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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