हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कान्हा की नगरी में राधे-राधे की धुन के साथ ही सांप्रदायिक सौहार्द भी देखने को मिल रहा है। बाल गोपाल के जिस मनमोहक शृंगार और पोशाक की चर्चा देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी होती है, उसे तैयार करने में मुख्य भूमिका मुस्लिम कारीगरों की है। पीढ़ियों से कान्हा के वस्त्र और मुकुट सजा रहे मुस्लिम कारीगरों ने मोरपंख की मनमोहक पोशाक और मुकुट तैयार किए हैं। इस बार जन्माष्टमी पर कान्हा की पोशाक, शृंगार सामग्री और मुरली-मुकुट के कारोबार में जबरदस्त उछाल की उम्मीद जताई जा रही है। देश और विदेश से आए ऑर्डर के मुताबिक कारोबारी इस बार 200 करोड़ से अधिक के व्यापार की उम्मीद जता रहे हैं। मुस्लिम कारीगरों के हुनर की गूंज अब सात समंदर पार भी सुनाई दे रही है। इस बार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और खाड़ी देशों से ब्रज की पोशाकों और शृंगार सामग्री के भारी ऑर्डर मिले हैं। विदेशी भक्त और प्रवासी भारतीय विशेष रूप से मथुरा में बनी जरी और जरदोजी वर्क वाली पोशाकें मंगवा रहे हैं। इसके अलावा कुछ जगहों से मोरपंख की पोशाक और मुकुट की मांग भी बढ़ी है।
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Author: Vijay Singhal
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