हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन में राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेले के समापन के बाद गिरिराज प्रभु से विदा लेते वक्त भक्तों की आंखें नम हो उठी। पिछले सात दिनों से भंडारा लगा रहे राजस्थान, बांदीकुई से आए नरेंद्र सिंह गुर्जर और अलवर के गांव कठूमर से आए रामबाबू चौधरी ने बताया कि गिरिराज जी के धाम जैसा कोई स्थल नहीं है। यहां आकर मन में श्रद्धा का भाव स्वत: ही उत्पन्न हो जाता है। परिक्रमा लगाता हर कोई एक समान होता है। कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। मेहंदीपुर बालाजी से आए जसवंत सिंह धाकड़ ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से गुरु पूर्णिमा मेले में करीब 30 लोगों की टीम के साथ श्रद्धालुओं की सेवा करते हैं। इस सेवा भाव के बाद गिरिराज तलहटी छोड़ने को मन नहीं करता। मध्य प्रदेश के भोपाल से आए पवन कुमार शर्मा ने बताया कि मुड़िया मेले के दौरान गिरिराज प्रभु स्वयं ही भक्तों को सेवा के लिए प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग तो ऐसे भी हैं जो अपने कारोबार और नौकरी से छुट्टी लेकर सप्तकोसीय परिक्रमा में श्रद्धालुओं की सेवा करने आते हैं। इसी प्रकार मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों से आए गोवर्धन धाम से जाते समय भावुक हो गए। जयपुर से आईं अनीता शर्मा ने बताया कि यहां साक्षात प्रभु का वास है, तभी तो यहां से जाने का मन नहीं करता। दरअसल, गोवर्धन में मुड़िया मेले के दौरान सेवाभावी लोगों ने प्याऊ, भंडारे, मेडिकल व्यवस्था, नाश्ता और भोजन आदि की निशुल्क सेवा की थी।
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Author: Vijay Singhal
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