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कोसीकलां के गांव फालेन में होली की धधकती आग से निकलेगा मोनू पंडा,1 महीने के लिए तप पर बैठा; होलिका दहन के दिन आग से निकलेगा मोनू

ByVijay Singhal

Feb 6, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा। कोसिकलां के गांव में फालैन का जलती होली की अग्नि से निकलने वाला पंडा को देखने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मथुरा के फालैन को प्रहलाद नगरी कहा जाता है। यहां का मोनू पंडा होली की जलती अग्नि से निकलने के लिए एक महीने के तप पर बैठ गया। कोसी शेरगढ़ रोड स्थित फालैन गांव में हर वर्ष होलिका दहन के दिन जलती होली की आग से पंडा निकलता है। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को एक बार फिर निभाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से मोनू पंडा का नाम तय किया। मोनू पंडा पिछले 4 वर्षों से जलती होली की अग्नि में से निकल रहे है। फालैन गांव में मोनू पंडा ने पहले प्रहलाद कुंड में स्नान किया। इसके बाद भगवान प्रहलाद जी के मंदिर में दर्शन किए और फिर पूजा अर्चना करने के बाद गांव की परिक्रमा शुरू की। ग्रामीणों के साथ बैंड बाजा की धुन पर गांव की परिक्रमा की गई। इस दौरान जमकर गुलाल उड़ाया गया। प्रहलाद मंदिर से शुरू हुई परिक्रमा गांव के विभिन्न रास्तों से होते हुए पुनः मंदिर पर पहुंची। इसके बाद प्रहलाद कुंड के समीप उस स्थान पर होलिका का पूजन किया जहां होलिका दहन के दिन होली जलाई जायेगी। फालैन गांव में होलिका दहन के दिन मुहूर्त के अनुसार होली जलाई जाती है। होलिका दहन के लिए आसपास के आधा दर्जन गांव के लोग उपले लेकर आते हैं। फालैन में करीब 25 से 30 फीट व्यास और 10 से 12 फीट ऊंची होली रखी जाती है। शुभ मुहूर्त में पंडा पहले प्रहलाद कुंड में स्नान करेगा और उसके बाद वह धधकती होली में से होकर निकलेगा। जलती होली से निकलने के लिए मोनू पंडा एक महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। मोनू पंडा घर छोड़कर प्रहलाद जी के मंदिर पर रहते हैं और वहां तप करते हैं। मोनू पंडा एक महीने तक अन्न भी नहीं खाते वह केवल फलाहार करते हैं। इतना ही नहीं होली में से निकलने से पहले 3 दिन तक सोते भी नहीं हैं। मथुरा के कोसी शेरगढ़ रोड पर स्थित फालैन गांव को भक्त प्रह्लाद जी का गांव कहा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह गांव दैत्यराज हिरण्य कश्यप के पुत्र प्रहलाद का है। पुराने समय में यहां के एक पंडा को सपना आया कि पेड़ के नीचे भगवान की प्रतिमा दबी हुई है। इसके बाद पंडा ने संतों के निर्देशन में खुदाई की। जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमा मिली। इसके बाद संत ने पंडा परिवार को आशीर्वाद मिला कि हर साल होली पर इस परिवार का जो भी व्यक्ति भक्त प्रहलाद की भक्ति करेगा वह जलती होली से निकल सकेगा।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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