गोस्वामी समाज ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉरिडोर बनाना ही है तो उसे यमुना नदी की ओर स्थित सरकारी भूमि पर विकसित किया जाए, न कि मंदिर के आसपास की कुंज गलियों, मकानों और दुकानों को तोड़कर। उन्होंने कहा कि ऐसा करना धार्मिक अपराध के समान होगा और इससे ठाकुरजी के ऊपर पाप आएगा, जिसे वे किसी सूरत में नहीं होने देंगे। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि मंदिर के दान या संसाधनों का उपयोग कॉरिडोर निर्माण में नहीं किया जाना चाहिए।
कमिश्नर ने संवाद के बाद मीडिया को बताया कि प्रशासन सभी पक्षों की बातों को गंभीरता से सुन रहा है। उन्होंने कहा कि हम गोस्वामी समाज से उनकी सभी आपत्तियां और सुझाव लिखित रूप में मांग रहे हैं ताकि उन्हें मुख्यमंत्री और शासन तक पहुंचाया जा सके। फिलहाल यह बातचीत का दौर है और किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों को भरोसे में लिया जाएगा। डीआईजी ने भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और मंदिर के महत्व को समझते हुए किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जाएगी। महंत मधु मंगल शरण दास ने कहा कि आप लोग जो न्यास बना रहे हैं, वह ठीक नहीं है। हमारे मंदिर की सेवा पद्धति का ध्यान केवल यहां के सेवायत ही रख पाएंगे। बाहरी का कोई काम नहीं। सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने कहा है कि अधिकारियों को पूरी सेवा पद्धति से लेकर कोर्ट के पुराने आदेशों के बारे में समझाया। स्थिति यह है कि सेवायत किसी भी सूरत में न्यास और कॉरिडोर के लिए तैयार नहीं हैं। सभी ने एलान किया कि हमारा विरोध जारी रहेगा। जिलाधिकारी ने अंत में सभी से कहा कि शासन प्रशासन किसी का बुरा नहीं करेगा, आप लोग थोड़ा समझें और कोई आपत्ति हो तो लिखित में बताएं।
