हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मान्यता है कि विशेष पर्वों पर यमुना नदी में डुबकी लगाने वाले को यम की फांस से भी मुक्ति मिल जाती है, लेकिन यमुना की सांस खुद ही फूली हुई है। यमुना में भारी गंदगी और प्रदूषण के कारण इसका पानी आचमन तो छोड़िए डुबकी लगाने लायक नहीं है। प्रदूषण के चलते यमुना नदी का प्रवाह कुंद हो गया है। कभी यह निर्मल एवं अविरल प्रवाहित होती थीं। अब गंगा दशहरा जैसे महापर्व पर श्रद्धालुओं को यमुना में डुबकी लगाने से पहले सोचना पड़ेगा। साफ-सफाई और स्नान योग्य पानी नहीं होना मुख्य कारण है। और तो और शहर के दर्जनों नाले का गंदा पानी भी यमुना में जाकर गिर रहा है। ऐसी स्थिति में यमुना का जल कैसे आचमन योग्य होगा। इसकी अब तक कोई रणनीति नहीं बनाई गई है। अधिकारियों की बैठकें सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि गंगा दशहरा पर्व को मात्र 10 दिन बचे हैं। यमुना घाटों पर ही नहीं यमुना किनारे सभी स्थानों पर बेशुमार गंदगी है। किसी भी स्थान का पानी आचमन योग्य नहीं है। यमुना में लगभग 10 नाले निरंतर गंदगी कर रहे हैं। इस कारण यमुना में विगत लंबे समय से प्लास्टिक व गंदगी कई मीटर गहराई तक जमा हो गई है। इसके चलते यमुना नदी से वाटर रिचार्ज नहीं हो रहा है। यमुना की जल भंडारण की क्षमता भी कम हो गई है। यमुना घाटों पर गंदगी कई मीटर गहराई तक जमा है, जो गंदा परिदृश्य प्रस्तुत करती है। अनिल कुमार, अपर नगर आयुक्त ने कहा, गंगा दशहरा को लेकर यमुना की सफाई की तैयारी की जा रही है। शनिवार को महापौर व नगर आयुक्त ने बैठक में इसकी रणनीति बनाई है। दो या तीन दिन में यह कार्य शुरू हो जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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