हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता तहसील क्षेत्र में 30 साल पहले नाले की भूमि की श्रेणी परिवर्तित कर पट्टे कर दिए गए। अब मामला सामने आने पर जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन के न्यायालय में वाद दायर किया है। न्यायालय ने 15 पट्टाधारकों को पट्टा निरस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। तहसील क्षेत्र के गांव अकबरपुर में नाले की जमीन पर कब्जा किए जाने के संबंध में एक पत्र 9 जनवरी 2025 को बीडीओ चौमुहां ने उच्चाधिकारियों को भेजा था। मामले में जब एसडीएम छाता से रिपोर्ट मांगी गई तो उन्होंने 25 जनवरी 2025 को पूरे मामले की रिपोर्ट उपलब्ध कराई। इसमें बताया कि 1995 में नाले की भूमि की श्रेणी में तत्कालीन उप जिलाधिकारी द्वारा बदलाव किया गया है, जिसके बाद 15 लोगों को पट्टा आवंटन भी किया गया है। वहीं 27 फरवरी 2025 को जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने भी अपनी आख्या में स्पष्ट कर दिया कि भूमि की श्रेणी परिवर्तन का आदेश अभिलेखों में अंकित है। यह भी बताया कि 9 सितंबर 1995 को जब यह आदेश जारी किया गया तब एसडीएम को सुरक्षित भूमि की श्रेणी परिवर्तित करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। सभी की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व की ओर से अपर जिलाधिकारी प्रशासन के न्यायालय में सभी 15 पट्टाधारकों के विरुद्ध पट्टा निरस्तीकरण का वाद दायर किया है। वाद की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सभी 15 पट्टाधारकों को पट्टा निरस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। साथ ही अपना पक्ष रखने के लिए 6 मई को स्वयं या अधिवक्ता को न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। न्यायालय में उपस्थित न होने पर एकपक्षीय रूप से पट्टा निरस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
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Author: Vijay Singhal
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