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बेसिक शिक्षा की कहानी, सत्र नया और किताबें पुरानी

ByVijay Singhal

Apr 19, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नए शैक्षिक सत्र में भी बेसिक शिक्षा विभाग पुराने ढर्रे पर चल रहा है। सत्र शुरू हुए 18 दिन बीतने के बाद भी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचीं हैं। शिक्षक उत्तीर्ण होने वाले छात्रों से किताबें मांगकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इससे शिक्षक और छात्र दोनों ही परेशान हैं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है। एक जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र को सालों पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बदलकर 1 अप्रैल से कर दिया था। नवीन सत्र का समय तो बदल गया, लेकिन व्यवस्थाएं बदलने में विभागीय अफसर नाकाम रहे। इस बार भी नए सत्र में 50 प्रतिशत स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचीं। कक्षा तीन तक की किताबें जहां अब तक आई नहीं हैं तो वहीं कक्षा चार से आठ तक की किताबें बीआरसी पर ताले में रखी हैं। 18 दिन बीतने के बाद भी किताबें जिम्मेदारों ने स्कूलों तक नहीं पहुंचाई। ऐसे में बच्चे बिना किताबों के स्कूल पहुंच रहे हैं तो वहीं शिक्षक भी बिना किताबों के पढ़ा रहे हैं। कुछ स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर से ही पुरानी किताबों की व्यवस्था उत्तीर्ण हो चुके छात्रों से की है। इन किताबों से शिक्षक बच्चों को पढ़ा तो रहे हैं, लेकिन बच्चों के पास किताबें न होने से उन्हें पढ़ने में परेशानी आ रही है। जिले में संचालित 1536 परिषदीय विद्यालयों में से अधिकांश का हाल कुछ ऐसा ही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने किताबें पहुंचाने का टेंडर भी कर दिया है, इसके बाद भी किताबें स्कूलों में नहीं पहुंचाई जा रही हैं। मजबूरी में स्कूलों के शिक्षक ही खुद व्यवस्था कर किताबें लाने के लिए मजबूर हैं। स्कूलों तक किताबें पहुंचने में हो रही देरी के लिए चाहे कोई भी जिम्मेदार हो, लेकिन खामियाजा आखिर में स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ही भुगतान होगा।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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