हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना की लठामार होली के लिए नंदगांव के हुरियारे तैयारी में जुट गए हैं। वह इन दिनों लाठियों के वार को सहने के गुर सीख रहे हैं। हुरियारे पौष्टिक आहार के साथ-साथ ड्राईफ्रूट का सेवन कर रहे हैं। बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली 8 मार्च को और नंदगांव में 9 मार्च को होगी। ये होली अपने आप में अनूठी है। हुरियारिनें इसमें चमचमाती लाठियां नंदगांव के हुरियारों पर तड़ातड़ बरसती हैं, लेकिन उन लाठियों में नफरत नहीं प्रेम भरा होता है। लाठियां बरसाने वाली हुरियारिन स्वयं को राधारानी की सखी और लाठियां खाने वाले हुरियारे स्वयं को कृष्ण के सखा के भाव में होते हैं। श्रीकृष्ण की अनुराग युक्त इस लीला को आज भी नंदगांव व बरसाना के लोग साकार करते हैं। वसंत पंचमी से ही दोनों गांवों के लोग लठामार होली की तैयारियों में जुट जाते हैं। महाशिवरात्रि के बाद होली के कार्यक्रम आरंभ हो जाएंगे। परमानंद गोस्वामी ने बताया कि ढाल को आकर्षक ढंग से तैयार किया जा रहा है। जब लठामार होली में बरसाना की महिलाएं लट्ठ चलाती हैं तो इसी ढाल से वह अपना बचाव करते हैं। बांके बिहारी गोस्वामी का कहना है कि नंदगांव से बड़ी संख्या में लोग बरसाना में होली खेलने के लिए जाते हैं। सभी अपनी-अपनी ढाल लेकर पहुंचते हैं। इन दिनों हुरियारे लाठियों से बचने का गुर सीख रहे हैं।
गोपाल गोस्वामी ने बताया कि ढाल ऑर्डर पर तैयार कराई जाती है। यह चमड़े से बनाई जाती है। ढाल का प्रयोग करना भी सीखना पड़ता है और सेहत भी बनाई जाती है।
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Author: Vijay Singhal
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