हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गीता जयन्ती महोत्सव के अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान, ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं गीता शोध संस्थान वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में जन्म स्थान लीला मंच पर गीता जयंती आयोजित की गयी। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद गीता के मूर्धन्य विद्वान धीरेंद्र शास्त्री ने श्रीमद् भगवत गीता के तत्व ज्ञान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। धीरेंद्र शास्त्री ने वर्तमान परिस्थतियों में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य अमृत वाणी श्रीमद् भागवत गीता की उपयोगिता को परिभाषित करते हुए कहा कि कर्म का फल वैराग्य होता है। यदि जीवन में धर्म का आकर्षण कम हो तो गीता पढें। गीता में 700 श्लोक और 18 अध्याय हैं। गीता के पहले छः अध्याय कर्म की प्रधानता को परिभाषित करते हैं। दूसरे छः अध्याय में भक्ति व शेष छः अध्याय ज्ञान परिभाषित करते हैं। गीता में कहा गया है कि कर्म और विचार भक्ति से प्रेरित होनी चाहिए। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान की अपनी एक महिमा है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने इस धरा धाम में जन्म लेकर महाभारत के युद्ध में गीता का सार समझाया था। गीता एक योग शास्त्र है, योग का मतलब योगा नही, योग का उद्देश्य चरम लक्ष्य की प्राप्ति है। मन को ईश्वर से जोड़ने का काम भी योग है। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में यही चेतना जागृत की है। गीता की संस्कृत कोई ज्यादा कठिन नहीं है। यदि अशुद्ध भी उच्चारण होगा तो भी धर्म का प्रयोजन सफल होगा। श्रीमद् गीता के व्याख्यान के उपरान्त ब्रज के सुप्रसिद्धि कवि अशोक यज्ञ द्वारा गीता पर लिखी गयी ख्याल-लावनी को गायक वीरेंद्र कश्यप और सम्पत लाल ने विशिष्टता से तैयार कर गाया। भक्तों ने यह लावनी का गायन सुना। इस अवसर पर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश खण्डेलवाल, सुप्रसिद्धि व्रज भाषा के कवि अशोक अज्ञ, जिला पर्यटन अधिकारी डी के शर्मा, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चन्द्र शर्मा, पत्रकार सुनील शर्मा, गीता शोध संस्थान के समन्वयक चन्द्र प्रताप सिंह सिकरवार, उप मुख्य अधिशाषी, अनुराग पाठक, प्रभारी जनसंपर्क विजय बहादुर सिंह एवं पी के वार्ष्णेय आदि ने गीता का पूजन किया।
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Author: Vijay Singhal
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