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बांकेबिहारी को सर्दी का अहसास होते ही बदलने लगा भोगराग

ByVijay Singhal

Oct 28, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में सर्दी का अहसास होते ही आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के भोगराग में भी बदल गया है। सेवायत उसी के अनुसार उन्हें निवेदित कर रहे हैं। श्रीहरिदास पीठाधीश्वर इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार श्रीबांकेबिहारी मंदिर में पूरे साल मौसम के अनुरूप संपादित की जाने वाली सेवाविधि में आराध्य की षोडश (16) वर्षीय किशोर अवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी भावसेवा का अनुसरण करते हुए शरद पूर्णिमा के बाद शीत का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने पर आराध्य के भोगराग में भी तब्दीली की जाने लगी है। अब आराध्य को दैनिक भोग सामग्री में गर्म पदार्थ निवेदित किए जाने लगे हैं। सर्दी के प्रभाव से उन्हें बचाने के लिए भोग सामग्री में केसर, अखरोट, बादाम, काजू, पिस्ता आदि की मात्रा बड़ा दी गई है। ठाकुरजी को लगाए जाने वाले चंदन में केसर मिलाया जा रहा है। दूधभात, सभी भोग, माखन-मिश्री और रात्रि दूध में भी प्रचुर मात्रा में केसर मिलाई जा रही है। श्रीहरिदास पीठाधीश्वर के मुताबिक सर्दी से बचाव के लिए ठाकुरजी को अब सनील, बेलवेट और मोटी असरदार पोशाकें पहनाई जा रही हैं। रात्रि में ठाकुरजी के शयनकक्ष में सोने के बाद चार लड्डू, चार पान के जोड़े और रजत पात्र में जल रखा जाता है। इसकी वजह है कि रात में यदि बिहारीजी की आंख खुल जाए और उन्हें भूख या प्यास लगे, तो वह इधर-उधर परेशान न हों।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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