हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मतांतरण की कक्षा के पीछे के राज सामने आ गए। शनिवार को पकड़े गए ईसाई मिशनरीज के सदस्यों से पूछताछ में पता चला है कि मतांतरण के लिए गरीब लोगों को मुफ्त शिक्षा, विदेश में नौकरी और आर्थिक लाभ का प्रलोभन दिया जाता था। इसके लिए धार्मिक सभा आयोजित होती थी और उसके माध्यम से दुख-दर्द दूर होने के दावे भी किए जाते थे। रविवार को पुलिस ने मिशनरीज के पांच सदस्यों को जेल भेज दिया। वहीं, पकड़े गए ताइवान के नागरिक की भूमिका न होने पर उसे छोड़ दिया गया। हाईवे थाना क्षेत्र के तुलसी नगर में शनिवार को अमरदेव के घर में सुबह से 50 से अधिक महिला-पुरुषों का मतांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा था। धर्म जागरण समन्वय के सह संयोजक विजय सिंह व अखिल भारत हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष छाया गौतम के साथ लोगों ने दोपहर एक बजे पहुंचकर विरोध जताते हुए हंगामा किया था। पुलिस मकान का गेट खुलवाकर अंदर गई तो चंगाई सभा (यीशू की प्रार्थना) लगी थी। पुलिस ने साई मिशनरी के पदाधिकारी सैमुअल समेत एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें ताइवान का नागरिक सिंगफू भी शामिल था। ईसाई मिशनरी के सदस्यों के पास से पुलिस को 250 बाइबिल व ईसाई धर्म से संबंधित साहित्य भी बरामद हुआ था। पुलिस के अनुसार मिशनरी के मुख्य पदाधिकारी सैमुअल ने धर्म की आड़ में लोगों का मतांतरण कराने के लिए गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, पढ़ाई के बाद बच्चों की विदेश में नौकरी के साथ आर्थिक लाभ का लालच दिए जाने की बात स्वीकारी है। सीओ रिफाइनरी श्वेता वर्मा ने बताया कि पूछताछ में सात लोगों की भूमिका नहीं पाई गई। सैमुअल समेत पांच लोगों को उप्र विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम के तहत जेल भेज जेल भेजा गया है।
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Author: Vijay Singhal
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