हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होते ही चुनाव आयोग का मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी आदर्श आचार संहिता लागू हो गया है. इसके तहत देशभर में अभियान चलाकर सियासी दलों के होर्डिंग, बैनर, पोस्टर उतारे जाएंगे. यही नहीं, सरकारी योजनाओं के होर्डिंग भी उतार दिए जाएंगे. आचार संहिता उल्लंघन की जानकारी सीधे चुनाव आयोग को की जा सकती है. आयोग तेज रफ्तार से इस पर कार्रवाई करेगा. बता दें कि जहां एक तरफ आचार संहिता को लेकर लोगों में जानकारी की कमी का फायदा उठाकर सरकारी अधिकारी काम करने से इनकार कर देते हैं. वहीं, लोगों में भी ये गलत धारणा है कि आचार संहिता सिर्फ राजनीतिक दलों और नेताओं पर लागू होती है. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो सावधान हो जाएं।
राजनीतिक दल या नेता ही नहीं, अगर आम आदमी भी आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो उसे भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है. हालांकि, आपका ये जानना बेहद जरूरी है कि इस दौरान सभी सरकारी कामकाज बंद नहीं होते हैं. लिहाजा, अगर कोई सरकारी अधिकारी आपके काम को करने से इनकार कर देता है तो आपको पता होना चाहिए कि नियम क्या कहते हैं. बता दें कि आपकी जिंदगी से जुड़े जरूरी काम आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सूरत में बंद नहीं होंगे. जानते हैं कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद आप क्या कर सकते हैं और आपको क्या नहीं करना चाहिए।
कौन-से काम आचार संहिता लागू होने के बाद भी नहीं रुकेंगे
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी आप अपनी पेंशन बनवाने के लिए सरकारी कार्यालय जा सकते हैं. कोई भी अधिकारी इसके लिए मना नहीं कर सकता है. वहीं, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र बनाने क काम भी इस दौरान जारी रहेगा. बिजली-पानी, साफ-सफाई से जुड़े काम सुचारू तौर पर होते रहेंगे. वहीं, आप इलाज के लिए आर्थिक सहयोग लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र रहेंगे. प्रशासन को सड़कों की मरम्मत का काम जारी रखना होगा. इसके अलावा किसी भी चालू परियोजना पर रोक नहीं लगेगी. आचार संहिता का बहाना बनाकर कोई अधिकारी आपके ये जरूरी काम नहीं टाल सकता है. अगर आपने मकान के नक्शे के लिए पहले ही आवेदन दे दिया है तो वो पास होगा. हालांकि, इसके लिए नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।
कौन-से काम आचार संहिता लागू होने के बाद भी नहीं रुकेंगे
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी आप अपनी पेंशन बनवाने के लिए सरकारी कार्यालय जा सकते हैं. कोई भी अधिकारी इसके लिए मना नहीं कर सकता है. वहीं, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र बनाने क काम भी इस दौरान जारी रहेगा. बिजली-पानी, साफ-सफाई से जुड़े काम सुचारू तौर पर होते रहेंगे. वहीं, आप इलाज के लिए आर्थिक सहयोग लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र रहेंगे. प्रशासन को सड़कों की मरम्मत का काम जारी रखना होगा. इसके अलावा किसी भी चालू परियोजना पर रोक नहीं लगेगी. आचार संहिता का बहाना बनाकर कोई अधिकारी आपके ये जरूरी काम नहीं टाल सकता है. अगर आपने मकान के नक्शे के लिए पहले ही आवेदन दे दिया है तो वो पास होगा. हालांकि, इसके लिए नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।
अगर कोई आम आदमी भी इन तमाम नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर भी आदर्श आचार संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. सीधे शब्दों में कहें तो अगर आप अपने किसी नेता के प्रचार अभियान से जुड़े हैं तो आपको इन नियमों को लेकर जागरूक रहना होगा. अगर कोई राजनेता आपको इन नियमों के खिलाफ काम करने को कहता है तो आप उसे आचार संहिता के बारे में बताकर ऐसा करने से इनकार कर सकते हैं. अगर आपने आचार संहिता का उल्लंघन करने वाला कोई भी काम किया तो आपके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी. ज्यादातर मामलों में आपको हिरासत में लिया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार मतदाताओं को लुभाने वाली कोई भी घोषणा नहीं कर सकती है. राज्यों में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं. बता दें कि आचार संहिता चुनाव आयोग के बनाए नियम हैं, जिनका पालन हर पार्टी और हर प्रत्याशी को करना जरूरी होता है. इनका उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है. प्रत्याशी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है. एफआईआर दर्ज करवाने के बाद उम्मीदवार को जेल भी भेजा जा सकता है।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कोई भी मंत्री सरकारी दौरे को चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है. सरकारी संसाधनों का किसी भी तरह चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. यहां तक कि कोई भी सत्ताधारी नेता सरकारी वाहनों और भवनों का चुनाव प्रचार या चुनावी दौरों में इस्तेमाल नहीं कर सकता. केंद्र सरकार और काई भी राज्य सरकार न तो कोई घोषणा कर सकती है, न शिलान्यास और न ही लोकार्पण कर सकती है. सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं किया जाता है, जिससे किसी भी दल को फायदा पहुंचता हो. इस पर निगरानी के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।
हर प्रत्याशी और राजनीतिक दल को जुलूस, रैली, जनसभा या बैठक करने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी लेनी होगी. इसकी जानकारी नजदीकी थाने को भी देनी होगी. सभा की जगह और समय की जानकारी पहले से पुलिस अधिकारियों को देनी होगी. कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा काम नहीं कर सकती, जिससे जाति, धर्म या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद या घृणा फैले. वोट पाने के लिए किसी भी तरीके से घूस देना, मतदाताओं को परेशान करना प्रत्याशियों और पार्टियों को भारी पड़ सकता है. यही नहीं, अगर कोई नेता किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करता है तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
