हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन के ब्रज भूमि के मंदिरों में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर जल यात्रा का आयोजन किया गया। जगन्नाथ जी की रथ यात्रा से 15 दिन पहले होने वाली जल यात्रा में भगवान का विभिन्न नदियों के जल,जड़ी बूटी और फलों के रस से अभिषेक कराया जाता है। वृंदावन के जगन्नाथ मंदिर में जल यात्रा में कराए गए अभिषेक के बाद 15 दिन के लिए मंदिर के पट भक्तों के लिए बंद कर दिए गए। मान्यता है कि अत्यधिक स्नान के कारण भगवान को ज्वर (बुखार) आ गया। इस कारण वह भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वृंदावन में यमुना तट स्थित जगन्नाथ घाट पर बने जगन्नाथ मंदिर में जल यात्रा के अवसर पर भगवान का सहस्त्र धारा अभिषेक किया गया। इस दौरान भगवान का देश की पवित्र नदियों के जल के अलावा जड़ी बूटी मिश्रित जल और फलों के रस से अभिषेक किया गया। करीब 1 घंटे तक चले अभिषेक के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। जल यात्रा के दिन अभिषेक कराने के बाद मंदिर के पट 15 दिन के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर के महंत ज्ञान प्रकाश पूरी महाराज ने बताया कि मान्यता है कि अत्यधिक स्नान से भगवान को ज्वर( बुखार) आ जाता है। इसके कारण वह एकांत में यानि अपने विश्राम कक्ष में 15 दिन के लिए चले जाते हैं। इस दौरान भक्त उनके दर्शन नहीं कर पाते। मंदिर के पुजारी भगवान की पूजा अर्चना विधि विधान से करते हैं। वृंदावन में स्थित जगन्नाथ मंदिर के महंत में ज्ञान प्रकाश पूरी महाराज ने बताया कि मंदिर में स्थापित प्रतिमा अत्यधिक प्राचीन है। जगन्नाथ पुरी में 36 साल बाद भगवान का विग्रह परिवर्तन होता है। उस समय जब पहली बार विग्रह परिवर्तन हुआ था तब यहां से एक भक्त हरिदास जगन्नाथ पूरी गए और भगवान के आदेश पर उस पहले विग्रह को वृंदावन लाये और यहां यमुना तट पर विराजमान किया। तभी से भगवान जगन्नाथ का पहला विग्रह इस मंदिर में विराजमान है। वृंदावन में जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा निकाली जाएगी। 20 जून को अरुणोदय बेला यानि सूर्योदय के साथ ही मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए जायेंगे। शाम के समय अलग अलग रथ में विराजमान कर भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा को नगर भ्रमण कराया जायेगा।
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Author: Vijay Singhal
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