बताया जा रहा है कि यह स्थिति गोकुल बैराज के दो गेटों की मरम्मत के कारण बनी है। इसके लिए बैराज के गेट खोले गए, जिससे जल स्तर में एकाएक बड़ी गिरावट आई है। हालांकि मरम्मत के बाद शुक्रवार रात में ही गेट फिर से बंद कर दिए। गोकुल बैराज के गेटों की मरम्मत का प्रस्ताव पिछले काफी समय से लंबित है। पिछले दिनों इसका जायजा लेने के लिए सिंचाई निर्माण खंड के अधीक्षण अभियंता मथुरा आए थे। इसके बाद गेट नंबर 8 और 16 की मरम्मत करवाने का निर्णय लिया गया।
शुक्रवार रात इन दोनों गेटों को खोल दिया गया। इसके बाद रात को मरम्मत की गई। यह दौर करीब 12 घंटे चला। रात भर दो गेटों के खुले रहने का असर यमुना के घाटों पर साफ नजर आया। शाम के वक्त ही पानी कम हो गया था। शनिवार को तो यमुना का जल घाटों से 6-7 फीट दूर चला गया और सिल्ट घाट किनारे आ गई। शनिवार तड़के बाहर से लोग यमुना स्नान करने पहुंचे तो कीचड़ देखकर विचलित हो गए। उन्हें बंगालीघाट और उसके आसपास के घाटों पर स्नान के लिए सिल्ट में से होकर जाना पड़ा। आचमन के लिए भी परेशानी हुई। यमुना जल का हाल और भी बुरा था। पानी में गंदगी साफ नजर आ रही थी। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशाषी अभियंता सतीश कुमार ने बताया कि मरम्मत के लिए गोकुल बैराज के दो गेट रात में खोले गए थे। सुबह कार्य पूरा होने पर बंद कर दिया गया। इस वजह से पानी की एकाएक कमी आ गई। यमुना की स्थिति को लेकर चिंतित
शहर के नाले एक बार फिर यमुना में सीधे गिर रहे हैं। इससे यमुना जल बेहद प्रदूषित हो गया है। हजारों श्रद्धालु यमुना महारानी के दर्शन, पूजन और स्नान के लिए मथुरा आ रहे हैं। ऐसे में यमुना मेंं निरंतर गिर रहा प्रदूषित पानी चिंता का कारण बना हुआ है।
ब्रज पर्यावरण संरक्षण परिषद के अध्यक्ष एवं तीर्थ पुरोहित माथुर चतुर्वेदी समाज के सरदार कांतानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, एनजीटी के आदेशों को दरकिनार कर जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। चातुर्मास में मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यमुना का यह हाल देख सभी व्यथित हो रहे हैं। परिषद के महामंत्री रामदास चतुर्वेदी ने कहा कि सात दशक बाद भी यमुना को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली में परिवर्तन नहीं आया है। इसी कारण यमुना में नाले गिर रहे हैं। सूर्यकांत चतुर्वेदी, चंद शेखर सोनू पंडित ने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर यमुना की स्थिति से अवगत करवाया है।
