हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता में योगिराज श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से सटे छाता की धरती उस आध्यात्मिक आभा में नहा उठी, जहां वैदिक पद्धति की शुद्धता और स्वामी दयानंद की क्रांतिकारी वाणी एक साथ गूंज रही थी। त्रिदिवसीय आर्य महासम्मेलन के समापन क्षण में स्वामी सच्चिदानंद छाता को नई चेतना, नई दृष्टि और नई प्राणशक्ति देकर गए। आर्य समाज छाता के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय आर्य महासम्मेलन का समापन उस भावपूर्ण वातावरण में हुआ, जब दूर-दराज से आए विद्वान, मनीषी और भजन उपदेशकों ने मंच से स्वामी दयानंद की विश्व को दी गई अमूल्य देन को जन-जन के सामने रखा। रात ढल रही थी, पर सभा की ज्योति, विचारों की तपिश और मन में उठती वैदिक ऊर्जा लगातार बढ़ती जा रही थी। स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि लगभग साढ़े सात लाख युवाओं को आर्य समाज ने ऐसी राष्ट्रभक्ति और आत्मबल दिया, जिसने देश को स्वतंत्रता की राह पर आगे बढ़ाया। समापन की यह रात छाता में केवल सम्मेलन का अंत नहीं थी, बल्कि एक नई वैदिक चेतना का उदय थी। अंतिम सभा के मुख्य अतिथि दुर्गपाल व विशिष्ट अतिथि अतुल वार्ष्णेय, सतीश जादौन रहे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध रागनी गायक नरदेव बेनीवाल धनीराम बेधड़क, संदीप आर्य ने लोगों को महर्षि दयानंद की विश्व को देन विषय पर संबोधित किया। इस दौरान चौ. प्रहलाद आर्य, महिपाल आर्य, विनोद कुमार आर्य, धर्मेद्र आर्य, चंद्रपाल आर्य, प्रवेश, दीपक, भगत सिंह, हरिओम, संदीप आदि सामिल थे।
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Author: Vijay Singhal
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