हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में गौ सेवा मिशन की ओर से गौ रक्षा और श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। मथुरा के वृंदावन स्थित गोरे दाऊजी मन्दिर में आयोजित सम्मेलन में संतों ने कहा कि अब भारत के पुनरुत्थान का समय है। अध्यक्षता कर रहे संत ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य श्री कृष्ण मंदिर के निर्माण का समय है। सभी सनातन धर्म से जुड़े लोगों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। अखिल भारतीय चतु: संप्रदाय के महंत फूलडोल दास महाराज, बिहारी दास भक्तमाली और गोरे दाऊजी आश्रम के महंत प्रह्लाद दास महाराज ने गौ रक्षा के संकल्प की याद दिलाई। सभी से कहा कि श्री कृष्ण की सबसे प्रिय गौ माता लंपी वायरस के कारण दम तोड़ रही हैं। यदि आज हम सुरक्षा के लिए खड़े नहीं हुए तो आगे आने वाली पीढ़ियां गौ दुग्ध से वंचित हो जाएंगे। सभी को सामूहिक रूप से गौ रक्षा के लिए तत्पर होना होगा। स्वामी कृष्णानंद महाराज की सहायता के लिए आगे आना होगा। सम्मेलन में स्वामी कृष्णानंद महाराज तथा गौ सेवी संत गोपेश बाबा ने गौ रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। लंपी वायरस से पीड़ित गौ माता की व्यथा को सबके सामने रखा और सभी से निवेदन किया कि गौ यज्ञ से बड़ा कोई यज्ञ नहीं। घर-घर से आज सनातन धर्म के लोगों को आगे आकर गौ रक्षा के लिए खड़े होने की आवश्यकता है। संत मोहिनी बिहारी शरण, महामंडलेश्वर नवल गिरी और महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद ने सभी को गौ रक्षा का संकल्प दिलाया । बैरागी बाबा आश्रम के श्री महंत हरि बोल बाबा और धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य बद्रीश ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बने इसी से पुनः हिंदू स्वाभिमान जागृत हो सकता है। मंदिरों को जिस तरह लूटा है उसके बारे में कोई चर्चा नहीं होती। अब हिंदू समाज शांत होने वाला नहीं है। अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ एवं धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहां की श्री कृष्ण और गौ माता में कोई भेद नहीं है। कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर बने साथ ही गौ माता की रक्षा भी हो आज समाज को दोनों की परम आवश्यकता है। इस अवसर पर स्वामी सुरेशानंद, कार्ष्णी नागेंद्र महाराज, भाजपा नगर अध्यक्ष विनीत शर्मा, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, बाल कृष्ण दास,आचार्य श्याम,यज्ञ आचार्य विष्णु कांत शास्त्री, कथा व्यास आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, जगदीप अत्री, मोहन सोनी, पंडित कैलाश पाठक, विकास पंडित, गोविंद सिंह, भरत गौतम, सुमित गौतम, अंशुल शर्मा, राजकुमार त्रिपाठी, पंडित श्रीकांत शर्मा, कौशल मिश्र, ओम शर्मा आदि मौजूद थे।
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Author: Vijay Singhal
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