हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। परिवहन विभाग लर्निंग लाइसेंस के बाद अब वाहन ट्रांसफर की सुविधा भी घर बैठे देने की व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत क्रेता-विक्रेता का सत्यापन करने के लिए दोनों के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा। दोनों आपस में ओटीपी साझा करेंगे, इसके बाद वाहन ट्रांसफर हो जाएगा। फिलहाल व्यवस्था लागू करने के लिए लखनऊ में इसका ट्रायल चल रहा है। यह सफल रहा तो नए वित्तीय वर्ष में यह व्यवस्था जनपद में भी लागू हो जाएगी।आरटीओ कार्यालय में दलालों का नेटवर्क खत्म करने और आम लोगों की आसानी के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार सभी सुविधाएं ऑनलाइन कर रही हैं। पहले सारथी पोर्टल लांच किया गया, जिसमें ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। इसमें नवीनीकरण की सुविधा भी जोड़ी गई। इसके बाद वाहन पोर्टल के माध्यम से डीलरों को वाहन रजिस्ट्रेशन का अधिकार दिया गया। अब पुराना वाहन बेचने के बाद ट्रांसफर की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी। पुरानी व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को आरटीओ कार्यालय आना पड़ता है। संबंधित सीरीज के शाखा प्रभारी दोनों से अपने सामने हस्ताक्षर करवाकर प्रक्रिया पूरी कराते थे। नई व्यवस्था के तहत दस्तावेज को ऑनलाइन स्कैन किया जाएगा। लाइसेंस आवेदन की तर्ज पर आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से क्रेता-विक्रेता का सत्यापन होगा। वाहन का मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए उप्र परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा। यहां एनआईसी का लिंक मिलेगा, यहां वाहन का मालिकाना हक ट्रांसफर पर बेचने वाले को क्लिक करना होगा। इसमें दिए गए फॉर्म को भरने के बाद बेचने वाले के आधार से उसका डाटा, लाइसेंस की तरह ही उठा लिया जाएगा। इसके बाद एक ओटीपी आएगा, जिसे डालने पर वाहन बेचने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अब नंबर आएगा खरीदार का, जो ऑनलाइन आवेदन पर खरीदी जाने वाली गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालेगा। इसके बाद बेचने वाले द्वारा भरी गई जानकारी उसके सामने आ जाएगी। यदि खरीदार ने संबंधित वाहन को खरीदने के लिए ओके कर दिया, तो उसके पास भी ओटीपी आएगा, जिसे लोड करते ही वाहन की स्वामित्व स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। प्रदीप कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन ने बताया सरकार लोगों की सुविधा और परिवहन विभाग में दलाली व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में बेहतर कदम उठा रही है। इसी क्रम में वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया भी ओटीपी आधारित करने जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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