हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ब्रजवासी व श्रद्धालुओं के लिए खतरा बने बंदरों की समस्या से जल्द निजात मिलने जा रही है। शासन स्तर पर दिल्ली की तरह कान्हा की नगरी के साथ अन्य जिलों में भी अभयारण्य बनाया जाएगा। यहां बंदरों को संरक्षित किया जाएगा, साथ ही उनका उपचार भी होगा। इसका संचालन वन विभाग करेगा। बंदरों को पकड़ने तथा प्रबंधन की कार्यवृत्त योजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा बनाई जा रही है। साथ ही बंदर पुन: वन्य जीव की श्रेणी में शामिल होंगे। इस निर्णय के बाद नगर निगम ने बंदरों को पकड़वाकर जंगल में छोड़ने का ठेका भी रद कर दिया है। पहले बंदर वन्य जीव की श्रेणी में शामिल थे। उस दौरान बंदर जंगलों में रहकर फल आदि का सेवन कर अपने पेट भरते थे। धीरे-धीरे इन्होंने आबादी क्षेत्र में ठिकाना बना लिया। धर्म की नगरी में हजारों की संख्या में बंदर मंदिरों व धार्मिक स्थलों के आसपास रह रहे हैं। इनका स्वभाव भी उग्र हो गया है। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के आसपास के बंदर तो श्रद्धालुओं का चश्मा ही नहीं कीमती सामान भी छीनकर नष्ट कर रहे हैं। कई लोगों की मृत्यु का भी ये कारण बन चुके हैं। वर्ष 2020 में सामाजिक वानिकी, वाइल्ड लाइफ विभाग ने फरह में बंदर संरक्षण केंद्र बनाने की कार्ययोजना शासन को भेजी थी। इसमें बंदरों के संरक्षण एवं उपचार आदि की व्यवस्था शामिल थी। 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूरी मिलती, उससे पूर्व वर्ष 2022 में शासन ने बंदरों को वन्य जीव की श्रेणी से ही बाहर कर दिया। इसके बाद संरक्षण केंद्र की कार्ययोजना रद हो गई। बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने बंदरों को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए। नवंबर, 2025 में शासन स्तर पर हुई बैठक में बंदरों की समस्या के समाधान को लेकर मंथन हुआ। इसमें नगर विकास विभाग द्वारा यह बात रखी गई कि बंदरों की प्रवृत्ति आबादी के क्षेत्र में रहने योग्य नहीं है। निर्णय लिया गया कि बंदरों को पकड़ने तथा प्रबंधन की कार्यवृत्त योजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बनाए। दिल्ली की तर्ज पर बंदरों के रखरखाव व संरक्षण के लिए अभयारण्य बनाया जाए। विभाग इसकी विशेष कार्ययोजना तैयार कर रहा है, जिसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। इसे लेकर वन विभाग भी तैयारी में जुट गया है।
