हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में सनातनी वर्ष के पहले दिन नव संवत्सर पर ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन को भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सनातनी नए साल पर आराध्य के दर्शन कर साल की शुरुआत करने वाले श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और देश की समृद्धि की कामना की। साल के पहले दिन मंदिर के पुरोहित आचार्य छैलबिहारी मिश्र ने काशी विश्वनाथ के पंचांग की गणना के आधार पर नववर्ष का फलादेश ठाकुरजी को सुनाया और सेवायतों ने ठाकुरजी को माखन-मिश्री व नीम पत्ती भोग में अर्पित की। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में नव संवत्सर पर रविवार को भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी। मंदिर के पट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया। पुलिस और सुरक्षागार्डों ने भी व्यवस्था संभालने के लिए मोर्चा संभाल लिया। सुबह शृंगार आरती के साथ ही सेवायतों ने ठाकुर बांकेबिहारी को माखन-मिश्री और नीमपत्ती भोग में विशेष रूप से अर्पित किया। मंदिर सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया वसंत में नीम वृक्ष में नवपल्लवित कोपलें आती हैं, जो स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए लाभकारी होती हैं। प्राचीन मान्यता रही है कि मौसम के बदवाल के दौरान होने वाली शारीरिक बीमारियों को नीम पत्ती का सेवन खत्म कर देता है और रक्त संचार में उपयोगी साबित होता है। चूंकि नीम पत्ती कड़वी होती है, इसलिए ठाकुरजी को माखन-मिश्री के मिश्रण के साथ नीमपत्ती भोग में अर्पित की जाती है और भक्तों को बांटी जाती है। नव संवत्सर के पंचांग का फलादेश सुनाते हुए मंदिर पुरोहित पंडित छैलबिहारी मिश्र ने ठाकुरजी को कहा कि पंचांग गणना के अनुसार ये सिद्धार्थ नामक संवत है, जिसका राजा और मंत्री सूर्य है। ऐसे में दुनियाभर के बड़े देशों के राजा मनमानी करेंगे। मानसून सामान्य से कमतर रहेगा। समुद्र में अधिकतर वर्षा होगी, जबकि धरती पर 25 फीसदी वर्षा होगी। इसके कारण फसलों में पैदावार ताे होगी, लेकिन पूरी तरह से फसल विकसित नहीं होंगी और उसका लाभ नहीं मिलेगा। संवत में फलेश शनि होने के कारण राजा भले ही मनमानी करेंगे। लेकिन, जनता को लाभ होगा। संवत में दुनिया के किसी बड़े देश के राजा की दुर्घटना में मृत्यु का योग है तो सिद्धार्थ संवत होने के कारण व्यापार में वृद्धि होगी और अनेक प्रकार के दरवाजे व्यापार के लिए खुलेंगे। पुरोहित आचार्य छैलबिहारी मिश्र ने ठाकुरजी को नए साल पर संवत का फलादेश सुनाया तो श्रद्धालु भी इस फलादेश को सुनने को उत्सुक नजर आए। आचार्य ने पूरे सालभर मंदिर में मनाए जाने वाले पर्व-उत्सवों की जानकारी देने के साथ ग्रहण, मानसून, पर्यावरण, पैदावार और राजनीतिक हालातों की गणना ठाकुरजी को सुनाई।
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Author: Vijay Singhal
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