हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन में गिरिराजजी भगवान को सर्दी से बचाने के लिए देशी नुस्खा से खान पिन का ध्यान रखा जाता है जिससे भगबान बीमार न पड़ जाए। भाव ही भक्ति का आधार है। ब्रजभूमि में भगवान की बाल स्वरूप में पूजा होती है। यानी जिस तरीके से बच्चे का खानपीन और कपडे़ मौसम के साथ परिवर्तन कर देते हैं। उसी तरीके से भक्त अपने भगवान की सेवा में बदलाव कर देते हैं। प्रभु को भाव का भूखा बताया जाता है, इसीलिए प्रभु की सेवा उनके भक्त निराले ढंग से करते रहते हैं। सर्दी के कदमों की आहट देखकर गिरिराजजी के भक्तों को प्रभु के स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी है। संगम स्थित गिरिराज मुखारबिंद के सेवायत विष्णु रावत ने बताया कि बढ़ती ठंड से गिरिराज बीमार न पड़ जाएं, इसके लिए शयन के समय मखमली रजाई का प्रयोग किया जा रहा है। सुबह लगने वाली ठंड से बचाव को प्रभु की सेवा में देसी नुस्खा सुहाग-सौंठ का सेवन कराया जा रहा है। भक्तों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। देशी मसालों से तैयार सुहाग-सौंठ में गरम मसालों का प्रयोग किया जाता है। मंगला आरती के समय प्रभु को सुहाग-सोंठ का भोग लगाया जाता है। मंगला के बाद मेवा युक्त गरम खिचड़ी बाल भोग में शामिल की जाती है। प्रभु के प्रसाद में आने वाले पदार्थों की सूची बदल दी जाती है। राधाकुंड संगम पर विराजमान मुखारबिंद गिरिराजजी की सेवा में छह माह का परिवर्तन हुआ है। ब्राह्मणान के 12 थोकों ने छह महीने के लिए विष्णु रावत को सेवायत बनाया है। सेवायत का बदलाव होते ही सेवा में भी बदलाव किया गया है। जतीपुरा मुखारविंद मंदिर सेवायत सुनील पुरोहित के अनुसार शुक्रवार से गिरिराज प्रभु की सेवा में गरमी प्रदान करने वाली वस्तुएं धराई जा रही हैं। गिरिराज प्रभु को सर्दी से बचाव के लिए बनाई जाने वाली सुहाग-सौंठ में कई सामग्री मिलाकर बनाई जाती है। सुहाग सौंठ में मुख्यत: केशर, कस्तूरी, जावित्री, काली मिर्च, लोंग, सौंठ, जायफल, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, खोवा, चीनी आदि का प्रयोग किया जाता है।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
