हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में जानकी भवन में आयोजित ब्रज के मूर्धन्य संत पं. जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली के 41वें प्रिया–प्रियतम मिलन महोत्सव के दूसरे दिन संत विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। कई संतों ने अपने विचार रखे। महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि भक्त और भगवान में कोई भेद नहीं होता। भक्तमाली जी और गोविंद एक ही भाव के प्रतीक थे। भक्त का स्मरण ही भगवान का स्मरण है। उन्होंने कहा कि पूज्य भक्तमाली जी भगवान के भाव स्वरूप थे, जिनकी वाणी, साधना और जीवन में प्रभु का प्रत्यक्ष वास था। भानुदेव आचार्य ने कहा कि भक्तमाली जी की आंखों से भक्ति की भागीरथी प्रवाहित होती थी और उनकी हर श्वास प्रभु का भजन थी। डॉ. अच्युत लाल भट्ट ने उन्हें संत समाज का परम श्रद्धेय बताया। डॉ. राम कृपाल भक्तमाली चित्रकूटी ने भी विचार रखे। महंत अमर दास और ब्रज बिहारी दास महाराज ने उन्हें भक्ति के सुमेरु पर्वत की संज्ञा दी। डॉ. नंद कुमार शास्त्री ने कहा कि उनके दर्शन से ही आत्मा को शांति मिलती थी, उनकी वाणी में अमृत था। राजू भैया व मुकेश मोहन शास्त्री ने भी विचार रखे। कार्यक्रम के समन्वय की भूमिका राजेश शर्मा, देवेंद्र शर्मा व संजय शर्मा ने निभाई। संयोजन डॉ. अनुप शर्मा ने किया। आभार पंडित रसिक शर्मा ने प्रकट किया।
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Author: Vijay Singhal
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