हिंदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। काशी से लाए गए तीन टन वजनी घंटे को विधि विधान के साथ महानव स्थित श्रीउदासीन कार्ष्णि आश्रम रमणरेती में स्थित ठाकुर रमण बिहारी मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा दिया गया। पूजन के बाद शाम चार बजे कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने घंटे को बजाकर इसका शुभारंभ किया। कार्ष्णि हरदेवानंद महाराज ने बताया कि तीन टन के घंटे को काशी के कारीगरों ने 15 महीने में तैयार किया है। यह ठाकुर रमण बिहारी मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित किया गया है। यह घंटा छह फीट लंबा और पांच फीट लंबा है। इसमें पीतल के अलावा अन्य धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। यह पहला घंटा है, जिस पर हाथी, मयूर, बंशी, कमलदल, अमृतकलश, गोमाता आदि की निर्मित की गई हैं। भगवान श्रीकृष्ण की आरती के दौरान ऐसा नहीं किया जाएगा। इसकी आवाज करीब सात किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी। इसे बजाने के लिए मशीन का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने दावा किया है कि इतने वजन का घंटा देश में अभी तक किसी भी मंदिर या आश्रम में नहीं लगा है। इससे पहले कबीरनगर (दुर्गाकुंड) स्थित श्रीउदासीन कार्ष्णि आश्रम से बुधवार को ट्रस्टी स्वामी ब्रजेशानंद सरस्वती ने मथुरा के लिए प्रस्थान किया था, जो गुरुवार शाम रमणरेती आश्रम पहुंचा। यहां पूजा के बाद आश्रम में प्रवेश किया गया। शुक्रवार की सुबह पूजा के बाद इसे ठाकुर रमण बिहारी के मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित किया गया। शाम चार बजे आश्रम के पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने संत के साथ घंटों की पूजा की और फिर घंटा बजाकर इसे चालू किया। इस दौरान कार्ष्णि स्वरूपानंद महाराज, कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, कार्ष्णि गोविंदानंद महाराज, कार्ष्णि दिलीप महाराज, पं. अशोक जोशी, पं. दिनेश मिश्रा, सुरेन्द्र यादव, राजेश जटवानी, समाजसेवी प्रमोद गर्ग कसेरे आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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