हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गंगा दशहरा पर पतंग उड़ाए जाने की परंपरा है। हालांकि अब युवाओं में पतंग उड़ाने के लिए पहले जैसा उत्साह नहीं रह गया है। फिर भी गंगा दशहरा पर इस परंपरा से आसमान सतरंगी नजर आया। फिलहाल युवाओं के बीच मोदी-योगी पतंग अभी भी काफी लोकप्रिय हो रही है। पुराने शौकीन झींगुरपुरा निवासी विजय बताते हैं कि इनकी बनाई पतंग हवा में पहुंचने के बाद बिलकुल हिलती नहीं थी। इससे पेच लड़ाने में भी मजा आता था। बताते हैं कि महाविद्या के मैदान और यमुनापार में पतंगबाजी प्रतियोगिता होती थीं। शौकीन रईस व्यक्ति प्रतियोगिता जीतने वाले पुरस्कार देते थे। दिन भर पेच लड़ते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। हाशिम भाई पतंग वाले बताते हैं कि उनकी तीसरी पीढ़ी पतंग बनाने-बेचने का काम कर रही है। हालांकि अब पहले जैसे ग्राहक नहीं रह गए हैं। यह शौक महंगा भी हो गया है। वहीं चाइनीज मांझे ने भी उनके व्यापार को काफी प्रभावित किया है। बताया कि इस समय युवा मोदी-योगी की पतंग अधिक खरीद रहे हैं। मेहताब पतंग वाले कहते हैं कि अब बच्चे मोबाइल में अधिक व्यस्त रहने लगे हैं। मैदान अब हैं नहीं, छत पर जाओ तो बंदरों का डर रहता है। ऐसे में पतंग उड़ाना मुश्किल हो गया है। बताया कि हालांकि फिर भी बच्चों में इस समय कार्टून की पतंग की काफी डिमांड है।
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Author: Vijay Singhal
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