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सरकारी खरीद में आलू का साइज, एवं शर्तें बनी रोड़, रामवीर सिंह तोमर

ByVijay Singhal

Mar 16, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा। भाकियू के बरिष्ठ किसान नेता और आलू किसान रामवीर सिंह तोमर ने कहा है कि एक तो सरकार ने आलू का समर्थन ही लागत मूल्य से नीचे तय किया है ऊपर से  45 से 85 एमएम आलू के साइज को खरीदने की शर्त रखी है, जिसे पूरा करना किसानों के लिए गम्भीर चुनौती है। आलू की लागत ही करीब हजार रुपये से 12 सौ रुपये क्विंटल आती है। जबकि सरकार ने समर्थन मूल्य 650 रुपये तय किया है। एक एकड़ खेत में करीब 120 क्विंटल आलू की पैदावार होती है जिसमे मोटे साइज के आलू की पैदावार आलू 60- 65 % होती है बाकी गोला और किर्री आलू की सरकार नहीं करती। दरअसल  सरकार ने 45 से 85 एम एम के एक विशेष प्रकार के साइज के आलू को खरीदने की शर्त रखी है
गढ़सौली के आलू किसान रतन सिंह पहलवान का मानना है कि खेत में आलू खुदाई के समय इस साइज का आलू 30- 40 प्रतिशत ही निकलता है। ऐसे में बचे 60-70 प्रतिशत आलू का किसान क्या करेगा। साथ ही किसानों के पास खेत में साइज मापने का साधन भी नहीं हैं। यदि अब किसान फिर से इस साइज के आलू की छटाई कराता है तो उसे एक क्विंटल पर 40 से 45 रुपए खर्चा अलग से देना पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि सरकार को समर्थन मूल्य बढ़ाने के साथ खरीद के मानक में भी बदलाव करने चाहिए। आलू किसान जगमोहन सोलंकी, सुधीर रावत, सुरेश शर्मा, हथकौली के रमेश सिकरवार, रवि सिकरवार, पचावर के ओमप्रकाश, नगला लोका के पूरन पहलवान, दघेटा के कुंतभोज रावत ने  कहा कि 6 साल पहले भी सरकार ने इसीतरह का समर्थन मूल्य और कड़े मानक तय किये थे जो फेल हो गये थे, 1% किसानों ने भी सरकार को आलू नहीं बेचा था। सरकार किसानों को लाभकारी मूल्य देना चाहती है तो उसे कम से कम 11-12 सौ रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और सभी प्रकार के आलू खरीदने चाहिए।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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