हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
ब्रज में दर्शनार्थ आ रहे तीर्थ यात्री रसखान समाधि भी पहुंच रहे, चित्रकारों के हाथों से सांझी बनाते सभी मुग्ध होकर रहे
ओपन एयर थिएटर पर रसखान के पदों पर आधारित संगीतमयी प्रस्तुति देख दर्शक भाव विभोर
मथुरा। गोकुल में उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उप्र पर्यटन और जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा सांझी महोत्सव-2023 के अंतर्गत रसखान समाधि पर अंतिम दिन 14 अक्टूबर को अनेक नई प्रकार की सांझी बनायीं गयीं।
शनिवार को वृंदावन के सौरभ गोस्वामी व साथी चित्रकारों ने परंपरागत कई प्रकार की सांझी बनायी। श्रीकृष्ण इंटर कालेज गोकुल के शिक्षक अनिल सोनी, खुशबू उपाध्याय ने श्रीकृष्ण के आकर्षक चित्र बनाए। ये चित्र सूखे रंगों से तैयार किए। खजानी बूमेन इंस्टीट्यूट को छात्रा मुस्कान प्राची, यामिनी,हर्षिता और भावना ने मॉडर्न श्रीकृष्ण का आकर्षक चित्र बनाये। इन छात्राओं ने इससे पूर्व होली की सांझी, रास की सांझी और राधा-कृष्ण की सांझी पर केनवास बनायी।
वृंदावन के चित्रकारों के अलावा गोकुल की श्रीमती लक्ष्मी और गोवर्धन की कलाकार श्रीमती पूनम यादव ने गोबर की वे सांझी बनायीं जो समूचे श्राद्ध पक्ष में हर दिन के हिसाब से बनायी जाती हैं। चित्रकारों ने रंग बिरंगी परम्परागत सांझी बना कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
रसखान समाधि स्थल स्थित इंटरप्रिटेशन सेंटर में “ब्रज की सांझी कला” विषयक सेमिनार का आयोजन भी हुआ। सेमिनार में ब्रज भाषा के कवि अशोक अज्ञ, ब्रजभाषा साहित्यकार सोटानंद जी नोएडा, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा. उमेश चन्द्र शर्मा, परिषद के कोआर्डीनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार व भागवताचार्य गोपाल गोप, श्रीमती विजेयता चतुर्वेदी ने “ब्रज की सांझी कला के महात्म्य” विषय पर विचार व्यक्त किए। सेमिनार के समापन पर कोआर्डिनेटर श्री सिकरवार ने कहा कि भविष्य में ब्रज तीर्थ विकास परिषद सांझी के अलावा अन्य कलाओं के संरक्षण कराएगी। उन्होंने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। चौथे दिन रसखान समाधि स्थल के ओपन एयर थियेटर में परासोली के कलाकार गोपाल गोप व उनके कलाकारों ने रसखान के पदों पर संगीत मय प्रस्तुति दी। मंच पर राधा व गोपियों ने रास की प्रस्तुति दी।
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Author: Vijay Singhal
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