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भागवत कथा में महारास लीला श्रवण कर भाव-विभोर हुए श्रोतागण

ByVijay Singhal

Jun 5, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृन्दावन के रमणरेती क्षेत्र स्थित श्रीभागवत निवास में चल रहे  सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव में छठवें दिन व्यासपीठ से भागवताचार्य जयंती नन्दन शरण मयूर कृष्ण महाराज (प्रभुजी) ने अपनी सुमधुर वाणी में सभी भक्तों-श्रृद्धालुओं को महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध एवं भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि के विवाह का प्रसंग श्रवण कराया।
भागवताचार्य जयंती नन्दन शरण मयूर कृष्ण महाराज (प्रभुजी) ने महारास लीला का प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि महारास लीला भगवान श्रीकृष्ण की एक अद्भुत व परम रसमयी लीला है।जिसे उन्होंने असंख्य ब्रजगोपियों के हृदय की अभिलाषा को पूर्ण करने लिए व अभिमानी कामदेव के अभिमान को नष्ट करने के लिए श्रीधाम वृन्दावन के यमुना तट पर शरद पूर्णिमा की रात्रि को किया था।जिसमें उन्होंने अनेकों रूपों में अपनी बांसुरी बजाकर संपूर्ण विश्व को ब्रजमंडल की ओर आकर्षित किया।लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला के दर्शनों के लिए समस्त देवी-देवताओं के साथ भगवान शिव भी ब्रज गोपी का स्वरूप धारण कर श्रीधाम वृन्दावन पधारे थे।
उन्होंने ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की महारास में सम्मिलित ब्रजगोपियां कोई साधारण स्त्रियां नहीं थी।वो पूर्व जन्म के महान तपस्वी ऋषि-मुनि थे।जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए अनन्त युगों तक कठोर तपस्या की थी।इसीलिए ब्रजगोपियां भी भगवान श्रीकृष्ण के समान ही परम आनंदमयी व चिन्मयी थीं।
भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी एवं डॉ. सतेन्द्र जोशी ने कहा कि भागवताचार्य जयंती नन्दन शरण मयूर कृष्ण महाराज (प्रभुजी) श्रीधाम वृन्दावन की पावन लीला भूमि पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा से अपने जीवन की आध्यात्मिक यात्रा आरंभ कर रहे हैं।हमें आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास भी है, कि वे सम्पूर्ण विश्व में सनातन धर्म व प्रभु भक्ति का प्रचार-प्रसार कर असंख्य व्यक्तियों को धर्म के मार्ग से जोड़कर उनका कल्याण करेंगे।
इस अवसर पर द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह की अत्यन्त नयनाभिराम व चित्ताकर्षक झांकी सजाई गई।साथ ही विवाह से संबंधित बधाइयों का संगीतमय गायन किया गया।
महोत्सव के अंतर्गत नित्य प्रति यजमान परिवार के द्वारा संत ,ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं भंडारा आदि के कार्यक्रम भी चल रहे हे।
इस अवसर पर भागवत निवास के महन्त वनमाली दास महाराज, कथा के मुख्य यजमान पंकज बिंद्रा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, मीनाक्षी बिंद्रा, रोहिन बिंद्रा, कांता – सुभाष बंसल, ब्रजबाला – लाजपत राय बंसल, जितेन्द्र अग्रवाल, उर्मिल-उमेश बंसल ,आशा-आनंद किशोर अग्रवाल, अमित, नीलांजनी, शोभा मित्तल, गुंजन अग्रवाल,गोपिका शर्मा, पुष्कर अग्रवाल, रामानुज शर्मा, संत जुगल दास महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा, नयन कृष्ण आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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