हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और पर्यटन विभाग की “ब्रज, गीता और पर्यावरण” विषयक संगोष्ठी
गीता शोध संस्थान सभागार में जिला पर्यटन अधिकारी ने पर्यावरण बचाने की शपथ दिलाई
मथुरा। वृंदावन में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 5 जून 2023 (सोमवार) को गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन के सभागार में *ब्रज, गीता और पर्यावरण* विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
परिचर्चा में पर्यटन अधिकारी श्री डीके शर्मा जी ने कहा कि पर्यावरण एक ऐसा विषय है, जिसे हम गीता और ब्रज से अलग नहीं कर सकते। भगवान श्री कृष्ण का गीता के तीसरे अध्याय में पर्यावरण के संबंध में उपदेश का उल्लेख आता है। श्री कृष्ण कहते हैं कि यज्ञ से वर्षा होती है और वर्षा से अन्न पैदा होता है। अतः वर्षा की महत्ता का अर्थ गीता में स्पष्ट है। आज वर्षा के बगैर पर्यावरण संतुलन संभव नहीं है। ब्रज में इसके संतुलन की आवश्यकता है। यह मानव जीवन के लिए एक जरूरी तत्व है।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चंद्र शर्मा ने कि ब्रज का संपूर्ण स्वरूप ही वनों से जुड़ा है। ब्रज के अंदर वनों के अलावा गाय, यमुना, पर्वत, चारागाह आदि भी पर्यावरण के मुख्य तत्व हैं। इन सबको बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। ब्रज पूर्व की तरह हरा- भरा रहे, यही प्रयास हम सभी को करना है।
साहित्यकार कपिल देव उपाध्याय ने कहा कि पर्यावरण एक व्यापक विषय है, जिसमें ब्रज में यमुना का प्रदूषण बहुत बड़ी समस्या है। वैसे तो प्राचीन काल से ही यमुना को प्रदूषण का शिकार होना पड़ा था। जैसे कालिया नाग ने यमुना को प्रदूषित किया था। वर्तमान में भी यमुना प्रदूषित है। प्रदूषण को दूर करने के ठोस उपाय होने चाहिए। श्री उपाध्याय ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी का फैलना प्रदूषित पानी के कारण है।
शिक्षाविद व अवकाश प्राप्त जिला विद्यालय निरीक्षक एस पी गोस्वामी ने कहा कि ब्रज और गीता पर्यावरण से जुड़े हुए ही विषय हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रदूषण दूर करने का संकल्प लेना होगा।
प्रेम महाविद्यालय इंटर कॉलेज के प्राचार्य डा वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि हमें पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए छोटे स्कूली बच्चों को जोड़ना होगा। उन्हें प्रदूषण जैसे विषयों पर समझाना होगा। उन्हे उपाय बताने होंगे।
गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने परिचर्चा का संचालन करते हुए कहा कि गहराता भूगर्भ जल संकट भी पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए हमें जागरूकता लानी होगी जिससे अगली पीढ़ी के लिए जमीन के अंदर के पानी को बचाया जा सके।
परिचर्चा में गौभक्त श्री सी के अरोड़ा ने गायों को बचाने पर बल दिया। गीता शोध संस्थान की शोध समन्वयक डॉ रश्मि वर्मा ने कविता के माध्यम से पर्यावरण का संदेश दिया। अंत में पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर परिचर्चा में उपस्थित वक्ताओं व श्रोताओं को पर्यावरण की शपथ दिलाई व सभी का आभार व्यक्त किया।
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Author: Vijay Singhal
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