हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन के इन गांवों में ठगों का यह धंधा नया नहीं है। दो दशक से भी अधिक समय से वह लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। लेकिन समय बदला तो इन्होंने ठगने का तरीका बदल दिया। पहले टटलू गिरोह लोगों को फोन कर सस्ता सोना बेचने, सस्ता वाहन बेचने के नाम पर बुलाता था और फिर बंधक बनाकर लूट लेता था। लेकिन करीब एक दशक से लूट का तरीका बदल दिया और साइबर ठगी करने लगे। इसके लिए बाकायदा ठगों का एक नेटवर्क काम करता है। गोवर्धन के अकेले देवसेरस गांव में ही करीब दस हजार की आबादी है। 70 प्रतिशत ठगी के धंधे में शामिल हैं। इनमें ज्यादातर मेव हैं। करीब दो दशक पहले से यह पीतल को सोना बताकर सस्ते में बेचने के लिए बुलाते थे। कभी किसी की लिफ्ट मांगी और उसे लूट लिया। ओएलएक्स साइट पर वाहन सस्ता बेचने की सूचना अपलोड की और फिर खरीदार को बुलाकर लूट लेते। करीब एक दशक से लूट का तरीका बदल दिया और साइबर फ्राड करने लगे। किसी की फेसबुक आइडी हैक कर उसके नाम से दूसरे से रुपये मांगना या फिर किसी को ब्लैकमेल करने का धंधा शुरू किया। यही नहीं कभी बैंक कर्मी तो किसी कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों को फोन पर तरह-तरह के लालच देते और फिर उनसे ठगी करते। बैंकों से पैसे भी पार कर देते थे। गिरोह के ज्यादातर सदस्य गांव से बाहर ही रहते हैं और गांव कभी-कभी आते हैं। समय-समय पर पुलिस साइबर ठगी करने वालों को गिरफ्तार करती है, लेकिन करीब डेढ़ दशक में पहली बार ठगों के किसी गांव में इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है। इससे दूसरे गांवों के टटूल भी अपने गांव छोड़कर भाग गए हैं। झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा की पुलिस आए दिन इन गांवों में साइबर ठगों को पकड़ने के लिए दबश दे रही है। टटलू गिरोह की जड़ें उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा की सीमाओं में फैली हैं। मथुरा के विशंभरा, हाथिया, देवसेरस, शेरगढ़ क्षेत्र, राजस्थान के कामां के आसपास के कई गांव, हरियाणा के मेवात तक यह जाल फैल चुका है। सीमा पार करने में एक मिनट लगता है, यही वजह है कि पुलिस के लिए पीछा करना भी कठिन हो जाता है। यह टटलू गिरोह साइबर अपराध के जरिए नेताओं और अधिकारियों को भी शिकार बना चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम की आइडी हैक करने के साथ ही उनके सगे-संबंधियों से पैसे लेता है। या फिर ओटीपी पूछकर खाते से रुपये पार कर देता है।
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Author: Vijay Singhal
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