हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग स्थित छत्तीसगढ़ कुंज, तुलसी कुंज परिसर में साकेतवासी महंत रामबली दास की पुण्य स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा एवं जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कथा का उद्घाटन श्री तुलसी पीठाधीश्वर, पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने किया।
कथा के प्रथम दिवस पर रामभद्राचार्य महाराज ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है और मोक्ष पाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि भगवान को गुणों से अलग नहीं किया जा सकता। ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य जहां निरंतर विद्यमान हों वहीं भगवान होते हैं। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई तुम कृपाल जापर अनुकूला, ताहि न व्याप त्रिविध भव सूला का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन पर भगवान की कृपा होती है, उन्हें त्रिविध ताप नहीं सताते। श्रीमद्भागवत में ही भगवान ने स्वयं को अक्षराकार रूप में प्रकट किया है। कार्यक्रम के शुभारंभ में रमणरेती के गुरु शरणानंद महाराज, छत्तीसगढ़ कुंज के गोपीकृष्णदास महाराज और वामदेव आश्रम के अनंत देव महाराज ने व्यासपीठ और आचार्य रामभद्राचार्य का विधिवत पूजन-अर्चन किया। इस मौके पर बागेश्वरधाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पहुंचकर व्यासपीठ पर प्रणाम कर आशीर्वाद लिया। कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और आचार्य रामचंद्रदास महाराज को राम और श्याम की उपाधि दी। यह दोनों मिलकर सनातन धर्म की पताका को विश्व भर में लहराने का कार्य करेंगे। इस मौके पर आचार्य चरण वृंदावली का पाठ तुलसी पीठ चित्रकूट के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्रदास ने किया। मशहूर चित्र-विचित्र महाराज ने भजनों की प्रस्तुति दी। कथा में सुदामा कुटी के संत सुतीक्षण दास, हेमकांत शरण, मदन मोहन दास, रघुवर दास, अंशुल, मनोज त्यागी, रोहित रिछारिया, सनत मिश्रा, परमहंसदास महाराज, तपस्वी छावनी, अयोध्या, अशोक बाहेती, विवेक उपाध्याय आदि मौजूद थे।
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Author: Vijay Singhal
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