कई दफा आक्रांताओं ने श्रीकृष्ण जन्म स्थान के मंदिर तोड़े हैं। वर्ष 1017 ईसवी में महमूद गजनबी ने सम्राट चन्द्रगुप्त द्वारा निर्मित मंदिर को तोड़ा। वर्ष 1150 ईसवी में मगोर्रा के सामंत शासक जाजन उर्फ जज्ज सिंह द्वारा निर्मित मंदिर को सिकंदर लोदी ने 16 वीं सदी में क्षतिग्रस्त कर दिया। वर्ष 1618 ईसवी में ओरछा के बुंदेला राजा वीर सिंह जुदेव ने मंदिर का निर्माण कराया जिसे वर्ष 1669 ईसवी में मुगल शासक औरंगजेब ने क्षतिग्रस्त कर दिया।
श्री कृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण पर अध्यक्ष डॉ. जहीर हसन द्वारा दिया गया अदालत के बाहर मामले को मिल बैठकर सुलझाने संबंधी बयान के बाद ईदगाह कमेटी की पहली बैठक आयोजित की गई। कमेटी द्वारा मुद्दे पर बोलने का समस्त अधिकार सचिव तनवीर अहमद को दिया गया। कमेटी के निर्णय के साथ ही अध्यक्ष द्वारा की जा रही पैरवी पर विराम लग गया है। इस संबंध में अध्यक्ष डॉ. जहीर हसन ने बताया कि जो जानकारी देंगे सचिव ही देंगे। शनिवार सुबह से ही ईदगाह कमेटी की बैठक होने की चर्चा जोर पकड़ने लगी। अपराह्न पश्चात तीन बजे ईदगाह कमेटी के कुछ सदस्य डॉ. जहीर हसन के चंदनवन स्थित आवास पर पहुंचे। यहां पर बंद कमरे में ईदगाह कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सदस्यों द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान संबंधी मामले पर विचार-विमर्श किया तथा अदालत में चल रही कार्रवाई को अमल में लाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगे से ईदगाह प्रकरण पर जो भी वक्तव्य दिया जाएगा, वह सचिव ईदगाह द्वारा ही दिया जाएगा। एडवोकेट तनवीर अहमद के अनुसार यह कमेटी की मासिक बैठक थी। वहीं इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हमें अच्छी तरह से पता था कि ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष द्वारा अदालत के बाहर के रास्ता अपनाने संबंधी बयान भ्रामक था। अयोध्या प्रकरण में भी यही हाल हुआ था।
ईदगाह की जिन दीवारों पर साक्ष्य दिख रहे हैं उनका सर्वे होना चाहिए। उन्हें साक्ष्य के तौर पर पेश किया जाना चाहिए। हमने इस प्रकार की मांग अदालत से की है। -शैलेष दुबे, अधिवक्ता, वादी विष्णु गुप्ता
