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रमज़ान व ईद पर कमजोर, असहाय और जरूरतमंद गरीबों की मदद को हाथ बढ़ाने चाहिए : समाजसेवी मुसरफ खान

ByVijay Singhal

Mar 24, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
आगरा। रमज़ान एक अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है ‘जलाने के’ यानी इस महीने में लोगों के तमाम गुनाह जल जाते हैं। इसलिए रमज़ान के पूरे महीने तमाम मुस्लिम लोग रोज़ा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक मुबारक महीना है, जो इस्लाम की पांच बुनियादों यानि स्तंभों में से एक है जैसे- पहला कलमा, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज आदि।
सुप्रशिद्ध एवं लोकप्रिय समाजसेवी मुसरफ खान ने बताया कि कई देशों में रमज़ान के महीने को “कुरान का महीना” भी कहा जाता है। रमज़ान को इबादत का महीना कहते हैं। इस पाक माह में पांचों वक्त की नमाज़ पढ़े। तरावीह की पाबंदी करें। अच्छे काम करें। बुराई से दूर रहे। कुरान की तिलावत करे। कमजोर, असहाय और जरूरतमंद गरीबों को ईद की खुशियों में शामिल करने के लिए रमजान राशन किट भेंट की जानी चाहिए। जिससे कमजोर, असहाय और जरूरतमंद गरीब का परिवार भी ईद उल फितर की ख़ुशियों में हम सब के साथ शरीक़ हो सके। गरीबों को जकात दे और गरीबों व जरूरतमंदों के लिए इफ्तार और सेहरी का इंतजाम करें। रमज़ान के महीने में तमाम मुस्लिम लोग ज़कात देते हैं। ज़कात यानी अल्लाह की राह में अपनी आमदनी से कुछ हिस्सा जरूरतमंद गरीबों में देना होता है।
श्री खान साहब ने आगे बताया कि रोजेदार यानी जो लोग रोजा रखते हैं। उसे बुरी आदतों को भी छोड़ना पड़ता है। रोजे में बुरे विचार भी दिमाग में नहीं लाने चाहिए।इसे आंख, कान और जीभ का रोजा कहते हैं। मुसलमानों के लिए रमज़ान का महीना बहुत ही पाक यानी पवित्र माना जाता है। इसलिए मुस्लिम लोग रमज़ान के पूरे महीने रोज़ा रखते हैं, पांचों वक्त की नमाज़ अदा करते, ज़कात देते हैं और अल्लाह की खूब इबादत करते हैं। रमज़ान के इस मुबारक महीने में अल्लाह की इबादत करने का दुगना सवाब मिलता है। पैंगम्बर के मुताबिक रमजान के महीने का पहला अशरा (दस दिन) रहमत का होता है। दूसरा अशरा मगफिरत का माना जाता है, और तीसरा अशरा दोज़ख से आजादी दिलाता है। इस महीने में लोग शराब पीना, सिगरेट पीना, तंबाकू या किसी भी नशीली चीज से दूर रहते हैं। रमज़ान के महीने का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस महीने में कई शब्बे-कदर की कई रातें आती हैं, जिसमें पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत की जाती है। रमज़ान के महीने के आखिर में ईद यानी मीठी ईदमनाई जाती है, जो पूरे 30 दिन रोज़े रखने के बाद आती है। इसलिए यह मुसलमानों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है। ईद के दिन लोग ईद की नमाज़ पढ़कर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और आपस में प्यास बांटते हैं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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