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व्रन्दावन में सोने की कोठी में विराजमान होकर निकले रंगनाथ,शेर पर सवार होकर दिए दर्शन,

ByVijay Singhal

Mar 11, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में श्री रंगनाथ मंदिर का 10 दिवसीय ब्रह्मोत्सव रथ मेला शुक्रवार से शुरू हुआ। शाम को वृंदावन में भगवान रंगनाथ सोने के सिंह पर विराजमान होकर निकले। भगवान की सवारी मंडप से बारहद्वारी पहुंची। जहां मंदिर के महंत और अन्य पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के बीच पाठ किया। इसके बाद परंपरागत वाद्य यंत्रों और बैंड की धुन बजाकर रंगनाथ की सवारी नगर भ्रमण के लिए निकली। इस दौरान स्थान-स्थान पर भक्तों ने भगवान की आरती की। भगवान की सवारी बाजार से होते हुए मंदिर के बड़े बगीचा में पहुंची। यहां कुछ देर विश्राम करने के बाद रात करीब 11 बजे सवारी वापस मंदिर लौट आई। इससे पहले सुबह रंगनाथ मंदिर में ब्रह्मोत्सव की शुरुआत गरुड़ स्तंभ पर 51 फीट की पताका लहराकर की गई। मंदिर में सुबह शुभ मुहूर्त में गरुड़ स्तंभ की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद विधि-विधान से 51 फीट ऊंचे गरुड़ स्तंभ पर गरुड़ जी की पताका चढ़ाई गई। दक्षिण भारतीय विद्वानों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण शुरू किया तो माहौल भक्तिमय हो गया। उत्सव के पहले दिन ध्वजारोहण के बाद भगवान रंगनाथ की सवारी निकाली गई। सोने से बनी कोठी को छोटे रथ पर रखा गया। इसके बाद भगवान रंगनाथ को इसमें विराजमान किया गया। निज मंदिर से परंपरागत वाद्य यंत्र और बैंड की मधुर ध्वनि के साथ भगवान की सवारी निकाली गई। भक्त साथ में भजन गाते हुए और नृत्य करते चल रहे। रंगनाथ भगवान के प्रमुख उत्सव ब्रह्मोत्सव के लिए मंदिर में आकर्षक सजावट की गई है। मंदिर के द्वार से लेकर परिक्रमा निज मंदिर तक सभी जगह को भव्य तरीके से सजाया गया है। बड़े बगीचा का गेट और मंडप को भव्य सजाया गया है। रंग बिरंगी लाइट से पूरा मंदिर परिसर और बगीचा बेहद ही आकर्षक लग रहा है। वृंदावन स्थित दक्षिण भारतीय शैली का श्री रंगनाथ मंदिर करीब 179 साल पुराना है। दक्षिण की वैदिक भूमि से ब्रज में भक्ति भूमि पर साधना करने आए संत रंगदेशिक महाराज की प्रेरणा से मथुरा के भक्त राधाकृष्ण, लक्ष्मीचंद और गोविंद दास ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। संवत 1901 से प्रारंभ हुए विशालकाय मंदिर का निर्माण 1906 में पूरा हुआ। बता दें कि वर्तमान में 2079 संवतसर चल रहा है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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