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सभी मनोरथों को पूर्ण करता हैं सिद्धचक्र महामंडल विधान

ByVijay Singhal

Mar 8, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कोसीकलां के श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुक्रवार को प्रारंभ हुआ। विधानाचार्य ने कहा कि इस विधान के करने से प्राणी संसार चक्र से छूटकर सिद्धशिला को प्राप्त करता है। भक्तों ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। पीत वस्त्र धारी इंद्र स्वरूप भक्तों ने सर्वप्रथम जिनेंद्र भगवान का पाद प्रक्षालन हुआ और फिर अभिषेक किया गया। इसके बाद सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना प्रारंभ हुई। झंडारोहण के साथ विधान का शुभारंभ चंदीलाल जैन, रिषभ जैन, जितेंद्र जैन शेरगढि़या ने किया। सौधर्म इंद्र द्वारा मंडल पर आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। विधानाचार्य नितेश जैन ने कहा कि यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जो हमारी जीवन के समस्त पाप, ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य। कृत्य चक्र का अर्थ है समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है। इनमें कई प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार, इसमें कई प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है। सिद्धचक्र महामंडल विधान सभी सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है, जो हमारे सभी मनोरथों को पूर्ण करती है। जैन दर्शन में अष्टानिका महापर्व का विशेष महत्व बताया। सिद्धचक्र विधान के बारे में अशोक नगर मध्य प्रदेश से पधारे नितेश जैन ने बताया कि प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32 इस प्रकार से बढ़ते क्रम में इस धार्मिक अनुष्ठान में कुल 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएगें। यह धार्मिक अनुष्ठान 14 मार्च तक चलेगा।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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