मथुरा। वृंदावन में श्रीमद्भागवत परमात्मा का अक्षर स्वरूप है और यह परमहंसों की संहिता है। यह हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाती है। यह कहना है कथावाचक रमेश भाई ओझा का नगर के गांधी मार्ग स्थित श्रौतमुनि निवास आश्रम में मंगलवार से 85वें होली महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। जिस प्रकार राजा परीक्षित ने श्रीमद्भागवत कथा सुनकर अभय प्राप्त किया वैसे ही यह कथा हर जीव को निडर और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज, स्वामी आनंद भास्करानंद, स्वामी वेदानंद, स्वामी अद्वैतमुनि, महादेव बापू और अन्य संतों ने श्रीमद्भागवत का विधिपूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर प्रकाश मुनि, स्वामी निर्गुण दास, स्वामी ओमश्वरानंद, स्वामी निर्मल दास, स्वामी श्यामानंद, स्वामी दिव्यानंद, स्वामी राममुनी आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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