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शक्ति, साहस, दृढ़ता एवं भक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं श्रीहनुमानजी महाराज : स्वामी नारायणाचार्य महाराज

ByVijay Singhal

Apr 23, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
वृन्दावन।कात्यायनी रोड़ स्थित रघुनाथजी नया मन्दिर में श्रीहनुमत् रामायण समिति के द्वारा चल रहे 53वें द्विदिवसीय श्रीहनुमज्जयंती महोत्सव के दूसरे दिन प्रात 10 बजे श्रीहनुमानजी महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के पूजन – अर्चन किया गया।साथ ही लड्डुओं के द्वारा उनका सहस्त्रार्चन समारोह आयोजित किया गया।इसके साथ ही चल रहा अखंड श्रीराम चरित मानस का पाठ भी संपन्न हुआ।
श्रीहनुमत् रामायण समिति के संस्थापक अध्यक्ष वनबिहारी पाठक ने कहा कि श्रीहनुमानजी महाराज जन-जन के आराध्य देव हैं।वे बल, बुद्धि, विद्या के सिंधु एवं करुणा के निधान हैं।हमारी समिति पिछले 52 वर्षों से प्रत्येक हनुमान जयंती को उनका जन्म महोत्सव प्रतिवर्ष अत्यंय श्रद्धा व धूमधाम के साथ मनाती है।
उपाध्यक्ष स्वामी नारायणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीहनुमानजी महाराज शक्ति, साहस, दृढ़ता एवं भक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं।पृथ्वी पर उनका अवतरण भगवान श्रीराम के कार्यों को सिद्ध करने के लिए हुआ था।इसीलिए वे सदैव उनकी सेवा में अग्रणीय रहते हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा की श्रीहनुमंत लालजी महाराज भक्ति व शक्ति के सेतु हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अनन्य उपासक हैं।जो भी व्यक्ति भगवान श्रीराम का नाम जपते हैं, उन पर श्रीहनुमानजी सदैव अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
सायं को गाजे-बजे के साथ समूचे नगर में श्रीहनुमानजी महाराज की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।जिसका समस्त नगर वासियों ने पुष्प वर्षा कर एवं आरती उतार कर स्वागत किया।श्रीरघुनाथजी नया मंदिर से प्रारंभ हुई शोभा यात्रा में मंदिर में विराजित हनुमानजी के चल विग्रह के अतिरिक्त श्रीराम दरबार और कई अन्य देवी-देवताओं की अत्यंत चित्ताकर्षक व मनोहारी झांकियां थीं।इसके अलावा शोभायात्रा में नगर के तमाम गणमान्य व्यक्ति साथ चल रहे थे।ये शोभायात्रा अनाज मंडी, पुराना बजाजा, वनखंडी, लोई बाजार, निधिवन, प्रताप बाजार आदि होती हुई रघुनाथजी नए मंदिर पर पूर्ण हुई।
तत्पश्चात वृहद संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा हुआ।जिसमें हजारों भक्तों-श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉ. रामसुदर्शन मिश्र, डॉ. रमेश चंद्राचार्य विधिशास्त्री महाराज, श्यामशरण पाठक, राधारमण पाठक, जगदीश नीलम, डॉ. हरिप्रसाद द्विवेदी, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, बालशुक पुंडरीक कृष्ण, गिरीश साहू, विजय गुप्ता, कृष्ण कुमार तिवारी, आशीष अग्रवाल, किशोरी शरण पाठक, नंदलाल, श्याम सुंदर शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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