हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में हाईकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी की बनाई गई आठ सदस्यीय कमेटी बृहस्पतिवार को तीसरे दिन भी ठा. श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र का सर्वे करने पहुंची। टीम ने इमारतों का स्थलीय निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, राजस्व विभाग और तहसील कर्मचारियों ने घर-घर जाकर गृह स्वामियों के नाम लिखने के साथ ही भवन की हालत और उसमें लगी सामग्री का अध्ययन किया। टीम ने दाऊजी तिराहा, हिसारियान गली, जंगल कट्टी, राधामोहन घेरा, बिहारीपुरा, पुरोहित पाड़ा, राधावल्लभ मंदिर के पीछे का क्षेत्र में सर्वे किया। टीम में शामिल अभियंताओं ने राजस्व विभाग के अधिकारियों व लेखपालों की मदद से चिन्हांकन कर भवनों पर तय दूरी पर निशान भी लगाए। जिससे दोबारा पैमाइश की जरूरत न पड़े। अब तक 207 भवनों को चिन्हित किया जा चुका। जबकि दायरे में 317 भवन गलियारे के दायरे में आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को सौ निर्माणों को चिन्हित किया गया है। चिन्हित और सर्वे का कार्य जुगलघाट से लेकर बांकेबिहारी मंदिर होते हुए वीआईपी मार्ग तक सड़क को दोनों ओर से 15-15 मीटर चौड़ीकरण के लिए भी पैमाइश की गई। प्रशासन की इस कवायद ने मंदिर के सेवायतों से लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सर्वें में मंदिर के चारों ओर बसावट में 25 मीटर दायरा शामिल किया गया है। नगर निगम से मोहनलाल, लेखपालों में अश्वनी और डालचंद्र आदि शामिल रहे। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में 17 जनवरी को यह रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। सेवायतों ने सुब्रमण्यम स्वामी से संपर्क साधा ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज का मंदिर इन दिनों प्रस्तावित कॉरिडोर योजना की वजह से सुर्खियाें में है। इसे लेकर सरकार अपनी मंशा साफ कर चुकी है, वहीं मंदिर सेवायत पूजा पद्धति और सेवा को बचाने के प्रयासों में जुटे हैं। लगभग 84 वर्ष पुरानी मंदिर की स्कीम (नियमावली) को बचाए रखने के लिए मंदिर के सेवायत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष को मजबूती से रखने के लिए मंदिर के कई सेवायतों ने राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी से भी संपर्क साधा है। ठाकुरजी के सेवायत एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलादवल्लभ गोस्वामी के अनुसार वर्ष 1939 में न्यायालय के निर्देशन में बनी मंदिर प्रबंध स्कीम में प्रबंध कमेटी का गठन, चार निर्वाचित व तीन मनोनीत सदस्यों का कार्यक्षेत्र और उनके अधिकार, सेवाक्रम का निर्धारण, सेवायती अधिकार, प्रशासक के रूप में पदेन मथुरा मुंसिफ की भूमिका, मंदिर की समुचित व्यवस्था संबंधित विभिन्न पहलुओं को व्याख्याइत किया गया है।
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Author: Vijay Singhal
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