भाजपा विधायक बोले शांति पूर्ण तरीके से निकले हल
परिचर्चा के विषय का उल्लेख करते हुए प्राचार्य ने बताया कि यह राष्ट्रीय महत्त्व का अत्यंत संवेदनशील विषय है। अतः आवश्यक है कि इस पर चर्चा परिचर्चा द्वारा समाधान की ओर बढ़ा जाये। विधायक राजेश चौधरी ने महाविद्यालय के इस महती प्रयास की सराहना करते हुए विवाद के शांति पूर्वक समाधान का समर्थन किया और कहा कि अयोध्या राम जन्मभूमि के विवाद के कारण देश को दंगों का दंश झेलना पड़ा। मथुरा में श्रीकृष्ण का जन्म सर्व विदित है। अतः विवाद न करके मुस्लिम पक्षकारों को शांतिपूर्ण ढंग से विवादित भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप देनी चाहिए जिससे हिन्दू उस पर अपने आराध्य का मंदिर बना सकें। सेमिनार में वादी पक्ष के अधिवक्ता राजेन्द्र माहेश्वरी ने अपने संबोधन में मुकदमें की जानकारी दी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पक्ष को सामने रखा। इसके साथ ही बताया कि 2020 में उन्होंने केशव देव जी के पक्ष से वाद दायर किया। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया कि विवादित भूमि का मालिकाना हक श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास है। उन्होंने कहा कि सेवा संघ के साथ ईदगाह कमेटी के समझौते को मान्य नहीं ठहराया जा सकता। क्योंकि सेवा संघ के पास सम्पत्ति के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष के पास अपने मत को सिद्ध करने के लिए साक्ष्य नहीं है। श्री कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के अधिवक्ता मुकेश खण्डेलवाल ने विवादित भूमि की जानकारी दी जो कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास ही है। ईदगाह पक्ष की और से शाहिद कमरे वाले ने कहा कि समझौता दोनों पक्षों के बीच में हुआ है इसको स्वीकार करना चाहिए। अन्य बाहरी लोगों को विवाद नहीं बढ़ाना चाहिए। आनन्द त्रिपाठी ने भी विवाद का हल नागरिक पहल के द्वारा किए जाने का समर्थन किया और पूर्वाग्रह को छोड़कर तथ्यों को स्वीकारने के लिए कहा। वादी एवं अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने जानकारी दी की ईदगाह में ही मूल जन्मभूमि है और वहां इसके साक्ष्य विद्यमान है। प्लेसिज ऑफ वर्शिप एक्ट की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक्ट इस संबंध में प्रभावी नहीं है। महाविद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने अपने प्रश्न अतिथियों के सम्मुख रखे और उनसे उचित समाधान प्राप्त किया।
