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बर्बादी देख आंखों में आंसू, छतों पर सुखा रहे सामान

ByVijay Singhal

Sep 15, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना में आई बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। जलस्तर 165.71 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। पानी के उतरने के बाद बाढ़ प्रभावित अब अपने घरों को लौटने लगे हैं, लेकिन चारों ओर बर्बादी का मंजर देख उनकी आंखों में आंसू हैं। बाढ़ के पानी ने घरों में रखा सारा सामान खराब कर दिया है। लोग घरों की छतों पर रखकर सामान सुखा रहे हैं। हालांकि जहां पानी ठहरा हुआ है, वहां ट्रैक्टर पंप सेट के माध्यम से जलनिकासी भी की जा रही है। प्रशासन ने दो से तीन दिन में स्थितियां सामान्य होने के आसार जताए हैं। इस आपदा से सबसे बड़ा कहर किसानों पर बरपा है। बाढ़ के पानी से 33 गांवों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं और किसानों की उम्मीदें पानी में बह गईं। जलस्तर में कमी के बावजूद, दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इधर, मथुरा-वृंदावन में दर्जनों कॉलोनियां में बाढ़ का पानी ठहर गया है। जयसिंहपुरा, लक्ष्मीनगर क्षेत्र के तिवारी पुरम, ईसापुर और हंसगंज में अभी भी हालात विकराल हैं, जहां पानी कम हुआ है, वहां अब मकानों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। घरों में कई दिन तक पानी भरा रहने के कारण कीमती सामान खराब हो गया है। जससिंहपुरा में कई कॉलोनियों में पानी उतरा तो लोग अपने घरों को लौटे। लोगों ने ताला खोलकर घर में देखा तो कपड़े, बिस्तर, अनाज और फर्नीचर के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह से खराब मिले। साथ ही घरों में मिट्टी भी जमा हो गई। लोग कीमती सामान वॉशिंग मशीन, फ्रिज, कूलर और टीवी को छतों पर रखकर धूप में सुखा रहे हैं। इधर, जलस्तर घटने के बाद शेरगढ़-नौहझील मार्ग पर आवागमन फिर से शुरू हो गया है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। एडीएम एफआर डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि लोगों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन की कई टीमें अभी भी निगरानी कर रही हैं। रविवार को हथिनीकुंड से 22 हजार क्यूसेक, ओखला से 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं गोकुल बैराज से 72 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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