हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। निजी स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू गया है। बच्चों का कोर्स खरीदने के लिए पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर भीड़ लग रही है। स्कूलों की अपनी-अपनी सेटिंग है। ऐसे में दुकानों पर तय स्कूलों की ही किताबें मिल रही हैं। दाम मनमाने हैं, लेकिन वहीं से खरीदना अभिभावकों की मजबूरी है। निजी स्कूलों की हर वर्ष बढ़ती फीस और महंगी होती किताबों का बोझ अभिभावकों का तनाव बढ़ा रहा है। प्राइवेट स्कूलों की किताबों के दाम आसमान छू रहे हैं, यह शिक्षा के व्यापार की ओर इशारा कर रहे हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि सभी स्कूलों ने दुकानें तय कर रखी हैं। कुछ स्कूलों ने तो पहली से पांचवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबोंं को ही नहीं लगाया है। वहीं छठीं से आठवीं तक कुछ किताबें एनसीईआरटी की हैं तो कुछ निजी प्रकाशकों की लगाई जा रही हैं। वहीं नौवीं से बारहवीं तक एनसीईआरटी की पढ़ाई जा रही है। इसके बाद भी एनसीईआरटी के साथ ही महंगी कीमतों की साइड बुक्स भी पुस्तक विक्रेता अभिभावकों को थमा रहे हैं क्योंकि स्कूलों से जारी कोर्स की सूची में साइड बुक्स भी लिखी हैं। पहली कक्षा के सेट की बात करे तो वह तीन हजार से साढ़े तीन हजार रुपये तक का है। स्कूल संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं की मनमानी से जैसे शिक्षा विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ हैं। अब तक नियंत्रण के लिए विभाग की ओर से कोई रणनीति नहीं बनाई गई है।
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Author: Vijay Singhal
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