साध्वी सत्यप्रिया ने कहा उमा शंकर राही की यह पुस्तक एक नए कलेवर में आई है जो साहित्य मनीषियों को अपनी और आकर्षित करने में सफल होगी। अपनी शुभकामनाएं देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमा शंकर पांडेय ने कहां की डॉ राही के इस संग्रह के दोहों में जीवन बोलता है और दोहे जीवन से बोलते हैं। कालजई रचना वही है जिसकी प्रासंगिकता हर काल में रहे। इस संग्रह में जीवन है,जगत है,मानव है और मानवता है। अर्थात वह सब कुछ समेटने का प्रयास है जो मानव जीवन को सत्यम शिवम सुंदरम की प्राप्ति करा सके। साहित्य मनीषी डॉ दिनेश पाठक शशि ने कहा जीवन के रंग दोहों के संग एक उत्कृष्ट दोहा संग्रह है। जिसमें 360 दोहे समाहित किए गए हैं। जो भावी पीढ़ी में राष्ट्रीयता के भावों का संचरण करते हुए जीवन के विविध रूपों से भी अवगत कराएंगे। वरिष्ठ कवि देवी प्रसाद गौड़ ने कहा है प्रस्तुत कृति में नाना भाव रंगों से चित्रित दोहों का प्रयोग मुक्त छंदों के रूप में किया गया है प्रत्येक दोहे की विचार वीथिका गागर में सागर भर्ती हुई प्रतीत होती है। मोहन लाल मोही ने कहां जीवन के रंग दोहों के संग दोहा संग्रह में डॉ उमा शंकर राही का विराट रूप दिखाई देता है। इस अवसर पर संजय भैया, अशोक सरीन, कवि विजय विद्रोही, सुश्री आयुषी अखेजा, दिनेश पाटीदार देसी घी, संदीपन संदीपनि, सुनील समर्थ, साध्वी समन्विता, स्वामी सत्यशील, स्वामी सत्यश्रवा,साध्वी शक्ति कीर्ति, साध्वी समन्विता , साध्वी सत्यमूर्ति, साध्वी सत्यव्रता सिया परमानंद आदि उपस्थित रहे ।संचालन विजय विद्रोही ने किया।अन्त में डॉ उमाशंकर राही ने सभी का आभार व्यक्त किया।
वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में कवि सम्मेलन मेंसाध्वी रितंभरा ने किया जीवन के रंग दोहों के संग पुस्तक का हुआ विमोचन
हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में स्थित साध्वी ऋतम्भरा के आश्रम वात्सल्य ग्राम में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वात्सल्य उत्सव के अवसर र आयोजित कवि सम्मेलन में देश के अलग अलग शहरों से आए कवियों ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर वात्सल्य ग्राम के प्रवक्ता उमा शंकर राही द्वारा लिखी गई पुस्तक जीवन के रंग दोहों के संग पुस्तक का साध्वी ऋतम्भरा ने विमोचन किया। वात्सल्य ग्राम वृंदावन में वात्सल्य महोत्सव पर आयोजित कवि सम्मेलन में वात्सल्य ग्राम्य के प्रवक्ता डॉ उमा शंकर राही द्वारा रचित जीवन के रंग -दोहों के संग पुस्तक का विमोचन साध्वी ऋतंभरा द्वारा किया गया । जीवन के रंग – दोहों के संग पुस्तक की विशेषता है कि इसमें लिखे गए 360 दोहे एक कड़ी में बंधे हुए हैं। पहला दोहा जिस शब्द पर समाप्त होता है दूसरा दोहा उसी शब्द से प्रारंभ होता है। लेखक का मानना है साहित्य जगत में यह संभवत पहला प्रयोग है। इस पुस्तक को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रकाशित किया गया है। पुस्तक का विमोचन करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा की राही द्वारा रचित दोहों की यह पुस्तक समाज को दिशा बोधक सिद्ध होगी । उन्होंने दोहों में एक नया प्रयोग किया है जो अत्यंत सराहनीय है। उमा शंकर राही राष्ट्रीय चेतना के कवि हैं उनकी दो कृतियां सच्चे पातशाह एवं चमकौर का युद्ध पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं यह उनकी तीसरी पुस्तक है। जीवन के रंग दोहों के संग यह पुस्तक निश्चित रूप से लोगों के जीवन में रंग भरने का कार्य करेगी। लखनऊ से आईं डॉ शोभा अग्रवाल “चिलबिल” ने कहां कि डॉक्टर राही द्वारा प्रकाशित पुस्तक जीवन का रंग दोहों के संग यह मात्र पुस्तक ही नहीं है मानव जीवन की समग्रता झलकता एक बिंदु है। यह लघु पुस्तक जीवन के हर पक्ष की दिशा और दशा का रसमय वर्णन है। इंदौर से आए कवि मुकेश मालवा ने पुस्तक की चर्चा करते हुए कहा कि उमा शंकर राही की पुस्तक ने साहित्य में अपना एक नया स्थान प्राप्त किया है उनके द्वारा किया गया यह प्रयोग निश्चित रूप से साहित्य जगत में श्री वृद्धि करने बाला है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से जीवन के यथार्थ को समझाने का सार्थक प्रयास किया है जो आने वाली पीढ़ी को मार्गदर्शन का कार्य करेगी ।
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