हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में ई-रिक्शा के रूट निर्धारण करने के लिए बार कोड बांटने के कार्यक्रम का तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने शुभारंभ किया था, लेकिन लिखित अनुमति नहीं दी थी। इस मामले में एलआईयू ने जांच शुरू कर दी है। वृंदावन में ई रिक्शाओं के रूट बांटे गए थे। पीएसए डिजिटल कंपनी की ओर से रूट निर्धारण कर ई रिक्शाओं पर बार कोड लगाए गए थे। कंपनी की ओर से 1400 ई रिक्शों पर बार कोड लगाया गया था। इसकी एवज में 1180 रुपये प्रति रिक्शा वसूले गए थे। कंपनी ने एक साल के लिए यह चार्ज लिए थे, लेकिन कंपनी एक साल से पहले ही कार्यालय को बंद करके चली गई। एसपी ट्रैफिक मनोज यादव ने बताया कि रूट वितरण के बाद कुछ माह तक स्थिति सही चली थी, लेकिन बाद में गड़बड़ा गई। रूट वितरण में सीधा ई रिक्शा चालकों को ही चूना लगा। बार कोड लगने के बाद निर्धारित रूट के हिसाब से कुछ ही समय रिक्शे चले और पुलिस ने सख्ती की, लेकिन कुछ महीनाेें बाद स्थिति जस की तस हो गई। रूट को न तो पुलिस ने चेक किया और ई रिक्शा चालकों ने तय रूटों पर गाड़ी चलाई। कंपनी के संचालक मनीष आहूजा का कहना है कि वह कंपनी की ओर सही काम कर रहे थे। कंपनी के कार्यालय में ई रिक्शा संचालन समिति की अध्यक्ष ने बाढ़ के दौरान रहना शुरू कर दिया। कार्यालय घर में तब्दील हो गया था। इस कारण से कार्यालय बंद कर दिया गया। हमारे कर्मचारियों को वहां से भगा दिया गया।
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Author: Vijay Singhal
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