• Thu. Feb 19th, 2026

कोसीकलां के भरत मिलाप में नयनों से मन में उतरी रघुनायक की छवि

ByVijay Singhal

Oct 4, 2025
Spread the love
हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कोसीकलां में परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए, स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े… अर्थात भरतजी पृथ्वी पर पड़े हैं, उठाए नहीं उठते। तब कृपासिंधु श्रीरामजी ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। उनके सांवले शरीर पर रोएं खड़े हो गए। नवीन कमल के समान नेत्रों में जल की सी बाढ़ आ गई। भरत मिलाप चौक में शुक्रवार की रात्रि घड़ी की सूइयों ने जैसे ही 11:40 बजाया, पूरा चौक जय श्रीराम के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। हजारों की भीड़, पुष्पक विमान में विराजमान रघुनायक, माता जानकी और लक्ष्मण। दूसरी ओर कोसी बनी अयोध्या में भरत और शत्रुघ्न। इस क्षण को देखने के लिए पलकें बिछाए लोग मौजूद थे। भरत मिलाप चौक पर जैसे त्रेतायुग उतर आया। चारों भाइयों के मिलन को देखकर हर किसी की आंखें सजल हो उठीं। प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद जब पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौटे तो प्रभु को देखकर भरत भूमि पर लेट जाते हैं। उनकी आखों से सागर रूपी करुण कुंदन बहने लगता है। प्रभु श्रीराम उनके पास जाते हैं और भरत को उठाकर अपने हृदय से लगा लेते हैं। लक्ष्मण और शत्रुघ्न भी 14 वर्षों के बाद एक दूसरे को देखते ही गले लग कर रोने लगते हैं। श्रीराम के पास भरत-शत्रुग्न के जाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने कंधों से मानव सड़क का निर्माण कर दिया। इस मानव सड़क से भरत एवं शत्रुघ्न अयोध्या के द्वार तक पहुंचे तथा वहां पहुंचकर रामजी से गले मिले। पुराने बिजलीघर पर कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, नरदेव चौधरी, दिनेश बठैनिया, सुभाष गोयल, हरिओम गुप्ता, गांधी चिकित्सालय के समीप ब्राह्मण महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश सुपानियां, रामकुमार शर्मा, रामकिशन शर्मा व अग्रवाल सभा अध्यक्ष संजीव जाविया, देशबंधु अग्रवाल ने आरती उतारी। संस्थान के मेला आचार्य मोरमुकुट शास्त्री, चेयरमैन धर्मवीर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष निर्भय पांडेय, समन्वयक हरेंद्र ठाकुर, अध्यक्ष अजय मंगला, अजय गोयंका, अन्नू वैद्य, पूर्व चेयरमैन भगवत रूहेला आदि मौजूद रहे।
7455095736
Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published.