हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के नंदगांव में ब्रज के अधिकांश मंदिरों में पूरे सावन मास राधारानी व श्रीकृष्ण को झूला झुलाने की परंपरा है। बावजूद इसके श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली और राधा रानी की ससुराल नंदगांव के विश्व प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में ऐसा नहीं होता है। यहां राधा-कृष्ण की बजाय श्रीकृष्ण और बलराम को झूला झुलाया जाता है। इसकी वजह है ब्रज की मर्यादा। सावन शुरू होते ही मंदिरों में राधा-कृष्ण को झूले में झुलाना शुरू हो जाता है। ब्रज में इस झूलन महोत्सव यानि हिंडोला उत्सव की शृंखला में नंदगांव के नंदीश्वर पर्वत पर स्थित नंदबाबा मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम को पूरे सावन में झूला झुलाया जाता है। नंदगांव में हिंडोला उत्सव गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक अनवरत चलता है। नंदगांव के नंदीश्वर पर्वत पर स्थित नंदबाबा के प्राचीन मंदिर में रोजाना शाम को भगवान कृष्ण और बलराम के विग्रहों को सोने चांदी के निर्मित भव्य हिंडोले में आकर्षक पोशाकों से सजाकर झुलाया जा रहा है। इस दौरान ब्रज की गोपियां भगवान को सावन के गीत गाकर लाड़ लड़ा रही हैं। इन गीतों पर मंदिर के सेवायत श्रीकृष्ण-बलराम को मंद मंद गति से झोटा देकर झुलाते हैं। श्री नंदराय जी महाराज नंदबाबा मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. भुवनेश गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव के नंदबाबा मंदिर में राधा कृष्ण नहीं बल्कि कृष्ण बलराम को झूला झुलाया जाता है। हरियाली तीज पर फल, फूल और पत्तियों से रजत हिंडोले को सजाकर दोनों भाइयों को झूला झुलाया जाता हैं। वहीं सेवायत लोकेश गोस्वामी बताते हैं कि नंदगांव राधारानी की ससुराल है। नंदबाबा यशोदा मैया के सामने वह मर्यादा में रहती हैं। इसी कारण राधारानी यहां झूला नहीं झूलतीं।
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Author: Vijay Singhal
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