हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर पर प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर अब विरोध के सुर उठने लगे हैं। व्यापारी,स्थानीय नागरिक और मंदिर के गोस्वामी विरोध के लिए अलग अलग रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कुछ लोग जहां हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं तो वहीं कुछ लोग मौके पर विरोध करने की रणनीति बना रहे हैं। बांके बिहारी मंदिर पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार काशी की तरह कॉरिडोर बनाना चाहती है। इसके लिए कवायद भी शुरू हो गई है। 5 एकड़ में बनने वाले कॉरिडोर में बांके बिहारी जी के लिए प्रवेश के लिए 3 रास्तों का चयन प्रस्तावित है। जिसमें एक मार्ग विद्यापीठ चौराहा से,दूसरा वीआईपी रोड से और तीसरा जुगल घाट हो कर। पिछले दिनों डीएम ने नगर आयुक्त की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय टीम बनाई। इस टीम ने बांके बिहारी मंदिर के आसपास स्थित भवनों का सर्वे किया। टीम ने यहां 4 दिनों में 341 भवनों का सर्वे किया। सर्वे के बाद टीम मूल्यांकन कर रही है। ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रस्तावित कॉरिडोर के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। बांके बिहारी मंदिर के आसपास करीब 300 दुकान हैं। इन दुकानों के कॉरिडोर में जाने की आहट से व्यापारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। इसी को लेकर व्यापारियों ने पहले एक धर्मशाला में बैठक की और इसके बाद बांके बिहारी मंदिर पहुंच कर मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। कॉरिडोर के नाम पर प्राचीन विरासत को नष्ट करने के षड्यंत्र से आक्रोशित व्यापारी,क्षेत्र वासी सड़कों पर उतर आए। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकाला। आक्रोशित लोगों ने विद्यापीठ चौराहा से लेकर बांके बिहारी मंदिर तक पैदल मार्च किया। बांके बिहारी मंदिर पहुंच कर लोगों ने जमकर नारेबाजी की और प्रस्तावित कॉरिडोर का विरोध किया। प्रस्तावित कॉरिडोर की जद में आने वाले लोगों के मकान, दुकान के तोड़ने और प्राचीन कुंज गलियों को तहस नहस करने की योजना वृंदावन वासियों को रास नहीं आ रही है। लगातार कई दिनों से चल रही सुगबुगाहट के बाद आखिरकार क्षेत्र वासी सड़कों पर उतर आए। सार्वजनिक बैठक के बाद जनांदोलन की रूपरेखा तैयार करने के बाद विद्यापीठ चौराहा से मंदिर के मुख्य द्वार तक पैदल मार्च निकाला गया। जिसमें हाथ में काले बैनर पोस्टर लिए सैकड़ों लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। प्रदर्शन कर रहे व्यापारी नेता अमित गौतम ने बताया कि आंदोलन को वृहद स्तर पर चलाने के लिए रणनीति तैयार कर ली गई है। कांग्रेस नेता कुंवर सिंह निषाद ने बताया कि प्रशासन को किसी भी क्षेत्र का विकास करने से पहले स्थानीय नागरिकों से चर्चा करनी चाहिए। वृंदावन कुंज गलियों का शहर है ये हेरिटेज शहर है। स्थानीय लोगों का मानना है कि वृंदावन भगवान कृष्ण की लीला स्थली हैं। यह नगरी कुंज गलियों के लिए विख्यात है। यहां आज भी भगवान कुंज गलियों से होते हुए निधिवन और सेवा कुंज में रास करने जाते हैं। यह गलियां जब कॉरिडोर में बदल जाएंगी तो यहां का महत्व खत्म हो जायेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी वीआईपी सुविधा के लिए कॉरिडोर का प्रस्ताव लाए हैं यहां इसकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। प्रशासन अगर इच्छा शक्ति रखे तो बिना कॉरिडोर बनाए ही बेहतर व्यवस्था कर सकता है।
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Author: Vijay Singhal
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