हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज रिपोर्ट उमाशंकर उर्फ कल्लन पंडित
मथुरा। सौंदर्यीकरण कराने के लिए यमुना घाटों से उखाड़े गए प्राचीन पत्थरों के मामले में सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना कि यमुना किनारे नए घाट विकसित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने पक्के घाटों का ही कायाकल्प शुरू कर दिया। प्राचीन लाल पत्थरों को पक्के घाटों से उखाड़ा जा रहा है। फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार मौन बने हुए हैं। यमुना किनारे स्थित कई घाट अपनी मजबूती और वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। यहां लगे प्राचीन लाल पत्थर न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि दशकों से पानी के कटाव को झेलते आए हैं। स्थानीय निवासी सचिन अरोरा, मानिक शर्मा और अखिलेश मिश्रा का कहना कि सरकार की योजना कच्चे किनारों को पक्का कर नए घाट बनाने की थी, ताकि शहरवासियों को अधिक विकल्प मिल सकें। इसके विपरीत, जिम्मेदार अधिकारियों ने बने-बनाए पक्के घाटों के पत्थर उखाड़कर वहां नया निर्माण शुरू कर दिया है। बीते तीन दिन से यह कार्य तेजी से चल रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। संतोष पाठक, क्षेत्रीय पार्षद ने कहा, यमुना किनारे नए घाट बनने का प्रोजेक्ट था, लेकिन जिम्मेदारों ने पक्के घाटों को ही उखाड़ दिया है। बजट खपाने के लिए जिम्मेदार बने-बनाए घाटों को बिगाड़ने में जुटे हैं, जबकि सिर्फ नए घाटों का विकास होना चाहिए। नवीन कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग ने कहा, यमुना किनारे 20 घाटों के कायाकल्प की योजना है। यहां से पुराने पत्थरों को उखाड़कर नए बलुआ पत्थरों को लगाया जाएगा। यह ब्रज तीर्थ विकास परिषद की योजना है। बीते दिनों से इसका कार्य शुरू कराया गया है।
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Author: Vijay Singhal
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