हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में खुद ही अपना ऑपरेशन करने के मामले पर नई बहस छिड़ गई है। मामला सामने आने के बाद रसिया के डॉ. लियोनिद इवानोविच रोगोजोव का जिक्र हो रहा है। वर्ष 1961 में सोवियत अंटार्कटिक अभियान में वह हिस्सा लेने पहुंचे थे, जहां उन्हें अपेंडिसाइटिस हो गया और उस समय वहां एकमात्र मेडिकल प्रोफेशनल होने के कारण उन्हें खुद ही अपेंडेक्टोमी करनी पड़ी। ये न भूलें कि वह चिकित्सक थे। ग्रेस्ट्रो सर्जन डॉ. नितिन गोयल ने बताया कि हर कोई लियोनिद रोगोजोव नहीं हो सकता। इस तरह के कृत्य से मौके पर जान जा सकती है। उनका कहना है कि वृंदावन में राजाबाबू द्वारा खुद ही अपना ऑपरेशन कर लेना जैसा प्रयास महानता नहीं बल्कि पागलपन की श्रेणी में आता है। इस प्रयास ने युवक ने न सिर्फ अपनी जान से खिलवाड़ किया, परिवार के सामने भी परेशानी खड़ी कर दी। अगर आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते उन्होंने यह कदम उठाया तो भी पूरी तरह गलत है, क्योंकि सरकार की ओर से आयुष्मान योजना चलाई जा रही है।
वहीं, कई चिकित्सक ऐसे हैं जो मानवता के नाते निशुल्क ऑपरेशन के लिए हमेशा तत्पर हैं। जो काम जिसका है उसी से कराना है। यूट्यूब देखकर ऑपरेशन करना अपनी जान से खिलवाड़ करना है। एक ओर जहां छोटी सी बीमारी होेने पर भी डॉक्टर के परामर्श से दवाई लेने की सलाह दी जाती है दूसरी ओर इस तरह का प्रयास करना कहीं से कहीं तक उचित नहीं है।
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Author: Vijay Singhal
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