मथुरा। वृंदावन में गीता शोध संस्थान व रासलीला अकादमी में आयोजित तीन दिवसीय भारत-नेपाल साहित्य सांस्कृतिक महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को भव्य रूप से हुआ। इस मौके पर नेपाल के कुलपति डॉ. घनश्याम न्यौपाने परिश्रमी ने कहा कि नेपाल और भारत भाई हैं, जिनकी सांस्कृतिक विरासत अमिट है। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे नेपाल में हिंदी बोली जाती है, वैसे ही भारत के लोग भी नेपाली भाषा सीखें। महोत्सव का शुभारंभ डॉ. घनश्याम न्यौपाने, डॉ. देवी पंथी, पूर्व प्राचार्य डॉ. केके शर्मा, राधारमण मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, गीता विशेषज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। कार्यक्रम सहयोगी डॉ. विजय पंडित और डॉ. हर्ष शर्मा ने कहा कि यह महोत्सव वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करता है और दोनों देशों के बीच साहित्यिक व सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। विशिष्ट अतिथि नेपाल की लघु कथाकार ममता मृदुल थीं। इस दौरान 25 लघु कथाकारों और साहित्यकारों की एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम बहादुर सिंह थे। सरस्वती वंदना शीतल राघव देवयानी द्वारा प्रस्तुत की गई, जबकि संचालन डॉ. हरेंद्र हर्ष और समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। गीता शोध संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश खन्ना ने आभार व्यक्त किया।
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Author: Vijay Singhal
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