हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नगर निगम ने आयोजित कैबिनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 587 करोड़ का बजट पारित किया, जोकि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 7 करोड़ अधिक है। 13 फरवरी को होने वाली बोर्ड बैठक में इस बजट पर चर्चा होगी। उसके बाद तय होगा कि यह राशि किस-किस मद में खर्च की जाएगी। बैठक के दौरान पार्षदों ने मुद्दा उठाया कि चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन माह में आखिर ऐसे कौन से बड़े कार्य हैं, जिन पर 277 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पार्षदों ने टैक्स वसूली मेंं पारदर्शिता नहीं बरतने के आरोप भी लगाए।
जनरलगंज स्थित नगर निगम कार्यालय में महापौर विनोद अग्रवाल की अध्यक्षता में शुरू हुई बैठक में 587 करोड़ का बजट पारित किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष में यह 580 करोड़ था। कैबिनेट सदस्य पार्षद वैभव अग्रवाल ने कहा कि विकास कार्यों के लिए बजट की कमी बताई जाती है, लेकिन निगम के अपने खर्चों में कटौती नहीं होती। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक नगर निगम ने 177 करोड़ रुपये खर्च किए और 31 मार्च 2024 तक यानी आगामी तीन माह तक कुल 497 करोड़ खर्च करेगी। नौ माह में 177 करोड़ खर्च हुए हैं तो तीन माह में ऐसे कौन से बड़े विकास कार्य हैं, जिनमें शेष राशि खर्च हो जाएंगी। नगर निगम के पास इतनी धनराशि पड़ी है और ठेकेदार भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं। ठेकेदारों का करीब डेढ़ सौ करोड़ बकाया चल रहा है। हालांकि इसका कोई जवाब नगर निगम की ओर से नहीं दिया गया। नगर निगम के विभिन्न करों से केवल 24 करोड़ की राजस्व प्राप्ति दिखाई गई है। कई लोगों को नोटिस और बिल नहीं पहुंचे हैं, जिन्हें अब भेजा जा रहा है, वे तीन साल के हैं। इसमें छूट 10 प्रतिशत की न होकर दो से तीन प्रतिशत की है। बैठक में पार्षदों ने सवाल उठाया कि इस छूट को बढ़ाया जाए। यह असमानता दूर होनी चाहिए। दरअसल जीआईएस सर्वे के अनुसार 1 लाख 80 हजार मकान चिह्नित किए गए हैं। टैक्स केवल 17 करोड़ रुपये, यानि करीब सौ रुपये प्रति मकान का औसत आया है। इसका मतबल है सभी से टैक्स नहीं लिया जा रहा है। जबकि मथुरा-वृंदावन में 35 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रॉपर्टी हैं। इन पर लाखों रुपये का बकाया है। मथुरा-वृंदावन में बड़ी संख्या में पार्किंग चल रही हैं, लेकिन उनके अनुसार टैक्स नहीं मिल पा रहा है। नगर निगम के नियमानुसार यदि किसी पार्किंग में 50 वाहनों को खड़े करने की क्षमता है तो उससे सालाना 20 हजार रुपये टैक्स लिया जाता था पहले, वो अब 40 हजार सालाना किया गया है। पार्षदों ने नगर निगम से मथुरा-वृंदावन में चल रहीं पार्किंग की संख्या के बारे में जानना चाहा तो कोई समुचित जवाब नहीं दिया गया। बैठक में नगर आयुक्त शशांक चौधरी के न पहुंचने पर पार्षदों में चर्चा रही। कुछ पार्षदों का कहना था कि नगर आयुक्त और महापौर के बीच कुछ मतभेद हैं, जिस कारण दोनों एक साथ बैठकों में आने जाने से कतराते हैं। बैठक में उपसभापति मुकेश सारस्वत, पार्षद राकेश भाटिया, हनुमान पहलवान और नगर निगम के अपर नगर आयुक्त रामजीलाल, अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सागर, लेखाधिकारी राजेश कुमार गौतम, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिवकुमार गौतम, अधिशासी अभियंता जलकल रामकैलाश, अधि अभियंता निर्माण एसके मिश्रा और मार्ग प्रकाश प्रभारी प्रशांत दीक्षित आदि मौजूद थे।
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Author: Vijay Singhal
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