हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में पंचदिवसीय गोदा रंगमन्नार विवाहोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को श्रीलक्ष्मी स्वरूपा मां गोदा का विवाह भगवान रंगनाथ से हुआ। विवाह उत्सव अंतर्गत पुस्कर्णी द्वार के समीप माला अदला बदली की गई। वैष्णव संप्रदाय की धार्मिक मान्यता के अनुसार, दक्षिण भारत के विल्लीपुत्तुर नामक ग्राम निवासी भगवद भक्त विष्णुचित्त भट्ट नाथ स्वामी की पुत्री रूप में अवतरित देवी गोदा ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए पौष मास में धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक व्रत किया। मास पर्यंत दिव्य प्रबंध पाठ कर तिरुप्पावे की रचना की। व्रत पूर्ण होने पर मां गोदा को भगवान रंगनाथ ने सहधर्मिणी रूप में वरण किया। मंगलोत्सव की वेला में मां गोदाम्मा का केसर मिश्रित हल्दी, चंदन से लेपन कर पवित्र नदियों के जल से अभिषेक के बाद सुवासित तेल से केश विन्यास किया गया। नवीन वस्त्र एवं भूषण धारण करवा कर विवाह की रस्में अदा की गईं। पुस्कर्णी द्वार के समीप माला अदला बदली की गई। इसमें मंदिर के पुजारी नाचते गाते माता गोदा की माला भगवान रंगनाथ के लिए और भगवान रंगनाथ की माला माता गोदा के लिए लेकर गए। यह क्रम 3 बार चला। माला अदला बदली के बाद भगवान रंगनाथ और माता गोदा की आरती की गई और फिर दोनों को मंडप में ले जाया गया। मंडप में भगवान रंगनाथ और माता गोदा जी का विवाह उत्सव हुआ। राजू स्वामी ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विवाह उत्सव कराया। इससे पहले सुबह माता गोदा की सवारी मां यमुना का पूजन करने और दर्शन करने के लिए केशीघाट पहुंची। जहां पूजन अर्चन के बाद कुंभ आरती की गई।
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Author: Vijay Singhal
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